हिसार। गांव हरिकोट के बास बुधवार रात सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवकों से परिजनों को बड़ी उम्मीदें थीं। चारों ही युवकों के परिवार और अपने लिए कुछ करने के बड़े सपने थे, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। सड़क हादसे ने पलभर में हंसते-खेलते परिवारों को जीवनभर का गम दे दिया। आजादनगर थाना पुलिस ने वीरवार को नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद चारों के शव परिजनों को सौंप दिए। दोपहर बाद तीन युवकों का मंगाली और एक का हरिकोट में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया।
जांच अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि किसी भी युवक ने नशा नहीं किया हुआ था। ओवर स्पीड हादसे का कारण हो सकता है। वहीं, ग्रामीणों ने हादसे के लिए रोड पर पड़ी बजरी, गड्ढों व मोड़ को मुख्य कारण माना। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि सभी के सिर में गहरी चोटें लगीं थीं। निखिल (17) और अंकुश(19) की सीने की हड्डियां टूटी थीं। साहिल(90) और हितेश (20) के हाथ- पैर की हड्डियां टूटी मिलीं।
कार की गति बहुत तेज थी
जांच में पता चला है कि कार की स्पीड बहुत अधिक थी। चालक के नियंत्रण नहीं रख पाने के कारण कार बेकाबू होकर पेड़ से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि हितेश उछलकर गाड़ी से बाहर दूर जा गिरा। अंदर फंसे तीनों दोस्त भी एयरबैग खुलने के बाद भी बच नहीं पाए। मंगाली सुरतिया निवासी सुनील ने बताया कि वह हिसार से बाइक पर अपने गांव की तरफ जा रहा था। नहर के पास पहुंचा तो देखा की एक कार पेड़ से टकरा कर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। वह कार के पास गया तो एक लड़का (निखिल) ड्राइवर वाली सीट पर बुरी तरह फंसा हुआ था। दूसरा उसके साथ वाली सीट पर था। साहिल पिछली सीट पर और हितेश का शव कार से बाहर पड़ा था। उसने पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस पहुंची और कार की खिड़की तोड़कर निखिल को बाहर निकाला। इसके बाद चारों शव को नागरिक अस्पताल पहुंचाया।
चाचा की गाड़ी लेकर जा रहा था सुरेश
मंगाली सुरतिया निवासी अंकुश के पिता सरमोद ने बताया कि बेटा अपने दोस्तों हितेश, साहिल और निखिल के साथ कार में सवार होकर हरिकोट के नजदीक एक पैलेस में शादी समारोह में गया था। साहिल अपने चाचा सुरेश की गाड़ी लेकर गया था। वहां कुछ देर रुकने के बाद चारों कार से ही हिसार के पीएलए में सामान लेने आए थे। यहां से वापस शादी समारोह में जा रहे थे और इस दौरान हादसा हो गया। अंकुल इकलौता बेटा था। अपने और परिवार के लिए कुछ करने के बड़े सपने देखता था। वह जाते हुए बताकर गया था कि रात में ही घर वापस आ जाएगा पर उसका शव घर ले जाना पड़ेगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
निखिल की वीरवार की फ्लाइट थी
साहिल व अंकुश राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में फर्स्ट ईयर के विद्यार्थी थे। निखिल राजकीय कॉलेज में पढ़ता था। उसके ताऊ बलबीर ने बताया कि चारों गहरे दोस्त थे। निखिल को आगे की पढ़ाई के लिए बेलारूस जाना था। उसकी वीरवार की फ्लाइट थी। निखिल के जाने से पहले चारों दोस्तों ने एक साथ शादी में जाने का फैसला लिया। साहिल घर में इकलौता बेट था। उसकी मौत ने कभी न भूलने वाला गम दिया है।
आर्मी भर्ती की तैयारी कर रहा था साहिल
साहिल और अंकुश घर में इकलौते पुत्र थे। अंकुश की एक बहन है। साहिल के चाचा के लड़के गुरमीत ने बताया कि साहिल घर में अकेला लड़का था। उसकी दो बड़ी बहनें हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है, दूसरी अभी पढ़ाई कर रही है। साहिल आर्मी में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा था।