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कोविड-19 नोडल अधिकारी डॉ. पूनिया ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर उठाए सवाल

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डॉ. रमेश पूनिया द्वारा अपनी फेसबुक पर डाली गई पोस्ट का स्क्रीन शॉट। - फोटो : Hisar
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ागरिक अस्पताल के जीव वैज्ञानिक डॉ. रमेश पूनिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने अपनी फेसबुक पर पोस्ट डालकर स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों पर सवालिया निशान लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया में छपी मेयर की पॉजिटिव खबर को झूठी साबित करने के लिए लिखित में देने का दबाव बनाया जा रहा है।
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पोस्ट में डॉ. पूनिया ने उन्हें आईडीएसपी इंचार्ज पर घर का भेदी लंका ढहाए यानी विभीषण की संज्ञा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाए - ‘यह सीबी नॉट टेस्ट केवल रसूखदार और पहुंच वाले लोगों के लिए रिजर्व है। विडंबना देखिए कि पिछले महीने आधार अस्पताल में कैथल की एक औरत की मौत हो गई और उसका शव तीन दिन तक शवगृह में पड़ा रहा, क्योंकि वह मजदूर की पत्नी थी। यह टेस्ट क्या केवल वीआईपी और रईसजादों का ही होता है’। सीबी नॉट टेस्ट अब तक दो ही हुए हैं, छह जुलाई को मेयर और उससे पहले 10 मई को अर्बन एस्टेट निवासी युवक का। आगे लिखते हैं - ‘चमचागिरी की भी हद होती है, मेयर कहते हैं कि घर के बाहर पोस्टर लगाओ, लेकिन अधिकारी कह रहे हैं पोस्टर नहीं लगाना’। वे अधिकारी कसूरवार हैं जो हमेशा चमचागिरी की हदें तोड़ते रहते हैं। कई बार तो मन करता है कि सब कुछ छोड़ दूं और अपने पैर पीछे खींच लूं....।
रजिस्टर्ड है सीबी नॉट टेस्ट मशीन और रिपोर्ट भी मान्य
रजिस्टर्ड है और रिपोर्ट भी मान्य है, जबकि इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए किसी सैंपल की जल्द रिपोर्ट लेने के लिए सीबी नॉट टेस्ट मशीन से जांच की जाती है।
ये है कैथल की महिला के शव का मामला
कैथल जिला निवासी एक महिला की मौत के बाद उसका कोविड-19 टेस्ट के लिए सैंपल भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट करीब 48 घंटे बाद निगेटिव आई थी। दो दिन तक उसका शव अस्पताल में रखा गया था और रिपोर्ट आने के बाद ही सौंपा गया था। इससे उसके परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी थी। यदि विभाग ने वह टेस्ट भी सीबी नॉट मशीन से करवाया होता तो उसकी रिपोर्ट जल्द मिल सकती थी।
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यह है मामला
मेयर गौतम सरदाना की छह जुलाई की शाम को एनआरसीई लैब से रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बाद सात जुलाई को मीडिया में यह खबर आई। विभाग का कहना है कि मेयर की रिपोर्ट निगेटिव है, क्योंकि विभाग द्वारा मेयर का अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की लैब में सीबी नॉट मशीन से दूसरा सैंपल टेस्ट हुआ था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसकेेे बाद विभाग ने एनआरसीई लैब की रिपोर्ट को अमान्य घोषित कर अग्रोहा की सीबी नॉट मशीन की रिपोर्ट को महत्व दिया। इसके अलावा मेयर द्वारा एक प्राइवेट लैब से भी टेस्ट कराना बताया गया, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव बताई गई।
वर्जन
मुझे चार्जशीट कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मैं अपनी जगह ठीक हूं और न ही मैंने कोई गलत काम किया है। जनहित के लिए हमेशा तत्पर रहूंगा। इससे पहले भी अधिकारियों द्वारा मुझे अर्बन एस्टेट निवासी युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था और कोविड-19 नोडल अधिकारी के पद से भी हटा दिया था।
- डॉ. रमेश पूनिया, कोविड-19 नोडल अधिकारी एवं जीव वैज्ञानिक, नागरिक अस्पताल
वर्जन
मैं इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं कह सकती। इस बारे में मुझे कोई सूचना मिल जाएगी तो मैं पूछताछ के बाद ही इस बारे में कुछ कह पाऊंगी। यदि कोई प्राइवेट लैब से टेस्ट करवाता है तो वह भी मान्य है। रही बात सीबी नॉट मशीन की मान्यता और एनआरसी लैब में जांच की तो इस बारे में अभी नहीं बता पाऊंगी।
- डॉ. रत्ना भारती, सिविल सर्जन, हिसार
फेसबुक पर पोस्ट संबंधी कोई सूचना मेरे पास नहीं है। यदि ऐसी बात है तो बिना देखे मैं कुछ नहीं कह सकती। इस बारे में आपको सीएमओ ही जवाब दे सकती हैं।
- डॉ. जया गोयल, आईडीएसपी इंचार्ज, हिसार
मैंने स्वास्थ्य विभाग के सारे नियमों का पालन किया है। यह राजनीति की जा रही है। कौन कर रहा है और क्यों कर रहा है, इसका मुझे नहीं पता। न ही मैंने कोई वीआईपी ट्रीटमेंट मांगा है और न ही मैंने किसी को पोस्टर लगाने से रोका है। मेरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद से मैं सबसे अलग रहा रहा हूं। यह तो नियम में है कि कोई भी बंदा होम आइसोलेट हो सकता है। जरूरी नहीं है कि वह अस्पताल में ही रहे।
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- गौतम सरदाना, मेयर, नगर निगम, हिसार
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