मधुमक्खियों के जिंदा रहने के लिए 34 से 35 डिग्री तक तापमान होना चाहिए। इससे कम या अधिक तापमान होना मधुमक्खियों के लिए हानिकारक है। इससे कम तापमान होने पर मधुमक्खियां गोला बनाकर तापमान का प्रबंधन करती हैं। गोला बनाने की स्थिति में रानी मक्खी तो सुरक्षित बच जाती है लेकिन बाहर की सतह पर रहने वाली मक्खियां ठंड के कारण बेसुध होकर मरने लगती हैं। इसके अलावा भोजन और मकरंद के लालच में ठंड में निकलीं मधुमक्खियाें को भी जान से हाथ धोना पड़ता है।
मधुमक्खी के बक्से को सीधी ठंढी हवा के संपर्क में न आने दें। काला पॉलीथिन लगाकर उसे ढंक दें। बक्से के बाहर और अंदर पैकिंग को ऐसे रखें कि बहुत अधिक खुला जगह न हो। जब मक्खियां काम पर न निकलें तो उनको चीनी का गाढ़ा घोल दें।
वैसे तो मधुमक्खियां खुद ब खुद तापमान नियंत्रित कर लेती हैं पर कई बार अधिक ठंड होने के कारण उन मधुमक्खियों की जान चली जाती है जो तापमान नियंत्रण करने के लिए समूह द्वारा बनाए गए गोले में बाहरी परत पर रह जाती हैं। पालक किसान को रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए। अब धूप निकलने लगी है तो कामगार मक्खियां काम पर निकलेंगी। खुद भी मजबूत होंगी और पराग मकरंद लाकर शहद कारोबार में जान भी फूकेंगी। एक दिन में रानी मक्खी दो हजार अंडे देती है ऐसे में कुछ दिनों में कामगार मधुमक्खियों की कमी दूर हो जाएगी। -डा. सुनीता यादव, कीट विशेषज्ञ, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार