किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक करती टीम। स्रोत : पुलिस
हांसी। खेतों में फसल कटने के बाद बची पराली को आग के हवाले करने के बजाय उसके उचित प्रबंधन से पर्यावरण और मिट्टी की सेहत बचाई जा सकती है। इसी संदेश के साथ जिला पुलिस किसानों को जागरूक कर रही है। पुलिस एडवाइजरी जारी करने के साथ गांवों में पहुंचकर किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित कर रही है।
अभियान के तहत जिला निरीक्षक सुनीता ने बुधवार को थाना सदर हांसी क्षेत्र के सुलतानपुर, देपल सहित अन्य गांवों का दौरा किया और धान की कटाई में जुटे किसानों से संवाद कर उन्हें पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत किया।
जिला निरीक्षक सुनीता ने किसानों को बताया कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। धुएं के कारण सड़कों पर वाहन चालकों को भी परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि खेतों में पराली जलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति प्रभावित होती है। इससे मिट्टी में मौजूद उपयोगी जीवों को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए किसान फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करें।
कृषि विभाग की सलाह से करें पराली का प्रबंधन
जिला निरीक्षक ने किसानों से अपील की कि वे कृषि विभाग की सलाह के अनुसार उपलब्ध संसाधनों और तकनीकों का उपयोग कर पराली का निपटान करें। इससे पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। हांसी पुलिस की ओर से किसानों और आमजन को जागरूक करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना और लोगों को प्रदूषण से बचाना है। पुलिस ने किसानों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने और पराली न जलाकर दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने की अपील की है। स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।