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कोरोना के साथ डेंगू की भी जांच, प्रतिदिन आ रहे डेंगू आशंकितों के 4 से 5 सैंपल

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शहर में एंटी लारवा एक्टिविटी अभियान के दौरान लारवा की जांच करते हेल्थ इंस्पेक्टर रमेश कुंडू व उन? - फोटो : Hisar
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हिसार। जिला स्वास्थ्य विभाग ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में अब कोरोना के साथ-साथ डेंगू की भी जांच शुरू कर दी है। विभाग के पास डेंगू आशंकित मरीजों के 4 से 5 सैंपल प्रतिदिन आने शुरू हो गए हैं। बुधवार सुबह भी जिला नागरिक अस्पताल में डेंगू संदिग्ध 5 लोगों के सैंपल जांच के लिए आए। इनमें से भिवानी जिले के रहने वाले 3 लोगों में डेंगू मिला, जो निजी अस्पताल में दाखिल हैं। विभाग के अनुसार इन तीनों का एनएस1 टेस्ट किया गया है और एलाइजा टेस्ट भी किया जाएगा। शनिवार को आए पिछले 4 सैंपल और बाकी बचे सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है।
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इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने जिले में एंटी लारवा एक्टिविटी अभियान भी शुरू कर दिया है। इसके तहत बुधवार को कुछ घरों में लारवा मिलने पर 10 लोगों को नोटिस दिए। राहत की बात यह है कि फिलहाल जिले में डेंगू का कोई केस नहीं है। पिछले वर्ष की बात करें तो इन दिनों में प्रतिदिन 15 से 20 सैंपल की जांच की जाती थी और उनमें से कम से कम एक व्यक्ति में डेंगू मिलता था। पिछले साल जिले में कुल 168 केस डेंगू के थे और एक मरीज की डेंगू की चपेट में आने से मौत भी हुई थी।
निजी अस्पताल संचालक नहीं कर सकते किसी को डेंगू घोषित
प्राइवेट अस्पताल संचालक किस व्यक्ति को डेंगू घोषित नहीं कर सकते, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई जांच में संक्रमित मिलने पर विभाग ही किसी व्यक्ति को डेंगू घोषित कर सकता है। प्राइवेट अस्पताल संचालक अपना टेस्ट करवाकर ही मरीज को डेंगू बता देते हैं।
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डेंगू और कोरोना दोनों वायरस की नहीं कोई दवा
स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ इंस्पेक्टर आरडी जांगड़ा ने बताया कि डेंगू और कोरोना दोनों ऐसे वायरस हैं, जिनकी कोई दवा नहीं है। इनमें संक्रमित मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना बहुत आवश्यक है। डेंगू में मरीज को प्लेटलेट चढ़ा दी जाती हैं, जिससे मरीज जल्दी रिकवरी करता है।
एलाइजा टेस्ट अधिक विश्वसनीय है
हेल्थ इंस्पेक्टर आरडी जांगड़ा ने बताया कि डेंगू की जांच के लिए दो टेस्ट किए जाते हैं, जिनमें एक एनएस1 और दूसरा एलाइजा टेस्ट। शुरुआती दौर में शक के आधार पर कुछ लोगों का एनएस1 टेस्ट किया जाता है। यह एनएस1 टेस्ट केवल किट से जांच किया जाता है, जिसकी रिपोर्ट करीब 6 से 8 घंटे के अंतराल में मिल जाती है। इसके बाद पूर्ण जांच के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता है, जिसकी रिपोर्ट करीब 2 या 3 दिन में मिलती है और यह अधिक विश्वसनीय है। कई बार एनएस1 टेस्ट के दौरान कुछ लोग डेंगू संक्रमित मिल जाते हैं। इस वजह से उनका दोबारा से एलाइजा टेस्ट होता है।
एंटी लारवा अभियान में लगीं टीमें
मलेरिया विभाग के हेल्थ इंस्पेक्टर आरडी जांगड़ा ने बताया कि अब लगातार ग्रामीण और शहरी इलाकों में डेंगू संदिग्ध लोगों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान लक्षण मिलने वाले सभी लोगों के टेस्ट के लिए सैंपल लिए जाएंगे। इसी के साथ फील्ड टीमें एंटी लारवा एक्टिविटी अभियान में भी जुटी हुई हैं। इसी के तहत बुधवार को कुछ घरों में लारवा मिलने पर 10 लोगों को नोटिस दिए गए हैं। इसके बाद आगामी कार्रवाई मार्केट कमेटी के इंचार्ज ऑफिसर के साथ मिलकर की जाएगी। पिछले साल विभाग द्वारा करीब 800 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे।
भिवानी के तीन लोगों में मिला डेंगू
डेंगू आशंकित मरीजों के 5 सैंपल जांच के लिए आए थे, जिनमें 3 लोग डेंगूू संक्रमित मिले हैं। ये सभी भिवानी जिले के रहने वाले हैं और शहर केेेे निजी अस्पताल में दाखिल हैं। फिलहाल विभाग की टीम फील्ड में कोरोना के साथ-साथ डेंगू की जांच भी कर रही है। फील्ड में एंटी लारवा एक्टिविटी अभियान भी चलाया गया है।
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डॉ. जया गोयल, उप सिविल सर्जन, हिसार।
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