हांसी। उपमंडल स्तरीय नागरिक अस्पताल में पांच वर्षों से खराब पड़ी 300 एमए की एक्सरे मशीन की जगह अब 500 एमए की नई मशीन की मांग की गई है। वर्तमान में अस्पताल में केवल 100 एमए की करीब 12 साल पुरानी और सीमित क्षमताओं वाली मशीन से काम चलाया जा रहा है, जिससे मरीजों और चिकित्सकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
छोटी मशीन की क्षमता सीमित होने के कारण रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, चेहरे और स्पाइन जैसे जटिल हिस्सों के एक्सरे बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहे हैं। परिणामस्वरूप, ऐसे मामलों में मरीजों को हिसार रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। वर्तमान में उपयोग में लाई जा रही 12 वर्ष पुरानी मशीन न केवल तकनीकी रूप से असमर्थ हो चुकी है, बल्कि यह एईआरबी (एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड) के दिशा-निर्देशों के भी खिलाफ है।
एईआरबी के नियमानुसार 10 वर्ष से अधिक पुरानी एक्सरे मशीन का उपयोग प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अस्पताल में इस मशीन से प्रतिदिन औसतन 50 से 60 एक्सरे किए जा रहे हैं, जिससे इसकी ट्यूब हेड फटने और तेल रिसाव की संभावना हमेशा बनी रहती है। पिछले वर्ष ऐसी ही तकनीकी खराबी के चलते एक्सरे सुविधा करीब 20 दिनों तक ठप रही थी।
7 वर्षों से लंबित है मांग
पिछले सात वर्षों से अस्पताल में बड़ी और आधुनिक एक्सरे मशीन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह मांग और अधिक प्रासंगिक हो गई है। महीने में करीब 800 से 900 एक्सरे इस छोटी मशीन से किए जाते हैं, जो इसकी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग से फिर भेजी गई मांग
अब अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग को नई 500 एमए एक्सरे मशीन के लिए दोबारा प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद की जा रही है कि मरीजों की सुविधा और स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही इस पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
मरीजों की संख्या के हिसाब से हमने 500 एमए की नई एक्सरे मशीन की मांग की है, 300 एमए की मशीन खराब पड़ी है। इस कारण 100 एमए की छोटी मशीन से काम चलाना पड़ रहा है। - डॉ. जसवंत कुमार, सीनियर रेडियोलॉजी ऑफिसर, नागरिक अस्पताल, हांसी