हिसार। लेटलतीफी की वजह से शहर की कई बड़ी विकास परियोजनाएं अधर में हैं। इससे न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ रही है, बल्कि इनके समय पर पूरा नहीं होने से आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
संबंधित विभाग कार्य समाप्ति की तिथि में बार-बार बदलाव कर रहे हैं। शहर में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट निर्धारित समयावधि से एक से दो साल की देरी से चल रहे हैं। अभी भी इनके जल्द पूरा होने की उम्मीद नहीं है। पीडब्ल्यूडी की ओर से सूर्यनगर आरओबी-आरयूबी का निर्माण चार साल देरी से पूरा हुआ। यह आरओबी करीब 32 करोड़ रुपये में बनना था, लेकिन देरी की वजह से इसकी लागत 72 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस आरयूबी-आरओबी को पूरा कराने के लिए शहरवासियों ने कई बार धरना-प्रदर्शन तक किए।
साउथ बाईपास पर सेक्टर 16-17 आरओबी अपने तय समय से करीब 18 महीने देरी से पूरा हुआ। इस वजह से प्रोजेक्ट का खर्च 22 करोड़ से बढ़कर 30 करोड़ तक पहुंच गया। कैमरी रोड आरओबी-आरयूबी 29 करोड़ में पूरा हो पाया। करीब दो साल की देरी भी हुई।
:::::::::::
साउथ बाईपास आरओबी
साउथ बाईपास पर 31 करोड़ रुपये की लागत से आरओबी बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट की डेडलाइन तीन बार बढ़ाई जा चुकी है। तय समय से करीब एक साल से अधिक की देरी हो चुकी है। अब भी प्रोजेक्ट पूरा होने में तीन से चार महीने का समय लगना तय माना जा रहा है।
-
बोस्टल जेल
हिसार में सिरसा रोड पर बनाई जा रही बोस्टल जेल अपने तय समय से पौने दो साल देरी से चल रही है। एजेंसी ने जुलाई 2021 में काम शुरू किया था। इसे 2023 तक पूरा होना था। 27.65 करोड़ की लागत का यह प्रोजेक्ट अब तक पूरा नहीं हो सका है।
-
छह मंजिला विश्राम गृह
डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने छह मंजिला विश्राम गृह की आधारशिला रखी थी। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से यह रेस्ट हाउस बनाया जाना है। यह प्रोजेक्ट भी अपने तय समय से देरी से चल रहा है। अब तक प्रोजेक्ट का 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। प्रोजेक्ट शुरू हुए 14 महीने का समय बीत चुका है।
देरी के यह बड़े कारण
आरओबी-आरयूबी के प्रोजेक्ट में रेलवे की ओर से देरी से मंजूरी मिलना।
एजेंसी के पास पर्याप्त संसाधन न होना।
विभाग की ओर से भुगतान में देरी करने के चलते एजेंसी की ओर से ढिलाई बरतना।
बिजली निगम, जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से लाइनों को हटाने के लिए समय पर काम न करना।
वन विभाग की ओर से पेड़ काटने में अनुमति देरी से मिलना।
::::::::::::::::
परियोजना में देरी होने से लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार अधिकारियों की लापरवाही के कारण देरी हो जाती है तो कई बार एजेंसी को समय पर बजट नहीं मिलता। डिजाइन आदि में बदलाव और कई तरह की परमिशन मिलने में देरी होने पर भी प्रोजेक्ट लेट होते हैं। - बीएस ढांडा, रिटायर्ड एसडीओ, पीडब्ल्यूडी एंड बीआर