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कोरोना की भयावयता : तीन भयानक रातें जीवन में कभी नहीं भूल पाऊंगी : डॉ. प्रियंका

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सुरेंद्र दलाल
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हिसार। वे तीन रातें मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकूंगी। रात को कुछ समय के लिए बिस्तर पर लेटते तो भी नींद नहीं आ रही थी। मन में डर बना हुआ है। बार-बार फोन की घंटी घनघना रही थी। हम अपने प्रयास डालने के बाद भी कुछ नहीं कर पा रहे थे। कोरोना की दूसरी लहर में 24, 25, 26 अप्रैल की रात सबसे खौफनाक थी।
हिसार की उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में इस तरह से अपने अनुभव साझा किए। उसने पूछा कि दूसरी लहर में ऐसा कौन सा वाकया रहा जो आपको जीवन भर याद रहेगा। इस पर डॉ. प्रियंका सोनी ने 24, 25, 26 अप्रैल की रात का जिक्र किया। डॉ. प्रियंका सोनी ने कहा कि उस समय ऑक्सीजन का संकट गहरा गया था। पूरे प्रयास करने के बाद भी ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में दिक्कत आ रही थी। चारों ओर से ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, बेड के लिए ही फोन कॉल आ रही थी। हमारी पूरी टीम दिनरात सक्रिय रहती थी। व्हाट्सएप ग्रुप पर निगरानी करते हुए अपडेट ले रहे थे। खैर वह बुरा दौर अब बीत चुका है। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
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केस कम हो रहे हैं, लेकिन लापरवाह न बनें
डॉ. प्रियंका सोनी ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में अब केस तीव्र गति से कम हो रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हम लापरवाह हो जाएं। जिले के हर नागरिक को अपना दायित्व निभाना होगा। कोरोना के प्रोटोकॉल को पूरा करना होगा। जरा सी लापरवाही हमें दोबारा से संकट में पहुंचा सकती है। अभी एक्टिव केस हजार की संख्या से अधिक हैं। फरवरी 2021 में हम कोरोना संक्रमितों की संख्या को जीरो पर ले आए थे। जीरो के अंक तक पहुंचने से पहले सफलता नहीं माननी चाहिए। हां कोरोना केस बहुत तेजी से कम हो रहे हैं तो इस पर खुशी है। चिकित्सकों की भूमिका सराहनीय है।
नहीं छिपाए मौत के आंकड़े, तीसरी से निपटने के लिए अभी से तैयार
डॉ. प्रियंका सोनी ने कहा कि मौत के आंकडे पर मैं इतना की कहना चाहूंगी कि हमने कुछ छिपाया नहीं। जिला प्रशासन ने पूरी सच्चाई, ईमानदारी के साथ काम किया। हकीकत से भागने की बजाय उसे स्वीकार किया। उसमें सुधार करने का प्रयास किया। हमने हर एक मौत को सत्यापित करने के बाद ही अपडेट किया है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर की आशंका को लेकर हम अभी से तैयार हैं। एक दौर आया था जब स्वास्थ्य विभाग का ढांचा संकुचित महसूस हो रहा था। अब हमारे दो से तीन गुना बेहतर संसाधन हैं। ऑक्सीजन का उत्पादन तीन गुना से ज्यादा हो चुका है। बेड की संख्या पांच गुना से अधिक है। वेंटिलेटर की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों पर किया फोकस, संजीवनी ने दी मानसिक मजबूती
उपायुक्त ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का दायरा अधिक तेजी से बढ़ा। इसके पीछे वायरस का म्यूूटेंट होना था। पहली लहर में कोरोना वायरस ने दुनिया में जितनी तबाही मचाई उतनी भारत में नहीं थी। उस समय हम काफी हद तक सुरक्षित रहेे। वायरस का लगातार म्यूटेंट होना चुनौती बना। ग्रामीण क्षेत्रों पर ही हमने पूरा फोकस किया। गांव-गांव में सर्वे कराया। अगर शहरी व ग्रामीण एरिया में संक्रमण दर की बात की जाए तो शहर में यह दर अब भी अधिक है। शहर में यह 11 और गांव में यह 5 प्रतिशत है। एक समय में यह 32 प्रतिशत तक थी। उन्होंने कहा कि संजीवनी अस्पताल में हमारे पास 500 बेड उपलब्ध हैं। संजीवनी अस्पताल शुरू होने के बाद मानसिक तौर पर भी मजबूती मिली है। अब हम मरीजों को बेड उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। अब गरीब लोगों की पहुंच में अस्पताल है।
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आगे क्या रहेगी प्लानिंग
डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने बताया कि नागरिक अस्पताल के बाद उपमंडल स्तर के अस्पतालों तक ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए योजना तैयार की गई है। जहां छोटे ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने हैं। अभी हमारे पास करीब 140 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर हैं। इनकी संख्या भी 300 की जाएगी। संजीवनी अस्पताल में वेंटिलेटर वाला आईसीयू बनाया जाएगा। जिसके लिए प्रस्ताव भेजा हुआ है। छोटे बच्चों के उपचार के लिए 20 बेड का चिल्ड्रेन क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित किया जाएगा। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में सीसीयू बनाएंगे। हेल्थ डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान के तहत काम किया जाएगा। कुछ जगह तय दर से अधिक पैसा वसूलने की जानकारी मिली है। ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। मेडिकल बोर्ड के नियमों के अनुसार ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। ऑक्सीजन की कमी से 5 मरीजों की मौत के मामले में अभी रिपोर्ट का इंतजार है। मेडिकल बोर्ड की सिफारिश के अनुसार कार्रवाई होगी।
फैक्ट
जिले की कुल आबादी : 17 लाख
अब तक संक्रमित : 52966 (पहली लहर में 17147 और दूसरी लहर में 35819 संक्रमित)
कुल सैंपल लिए : 553949
अब तक स्वस्थ : 50417
अब तक मौत : 992 (पहली लहर में 327 और दूसरी लहर में 665 मौत)
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