पुलिस द्वारा बिठमड़ा प्रकरण में जाति विशेष के चार लोगों पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने और एससी एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने के बाद मृतक राजबीर के परिजनों ने सोमवार को 53 घंटे बाद शव उठा लिया। तीसरे दिन दिनभर गांव बिठमड़ा और सिविल अस्पताल में माहौल तनावपूर्ण बना रहा। दलित समाज के कई संगठनों के पदाधिकारी और वाल्मीकि समाज के लोग यहां सिविल अस्पताल में पहुंचे और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। शाम पांच बजे बाद शव उठाया गया।
इससे पहले भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अशोक सुनसुना ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यदि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की तो वे आंदोलन को फैला देंगे। जिसकी सारी जिम्मेवारी यहां के प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि वे हर कीमत पर न्याय पाकर रहेंगे। वीर वाल्मीकि जागृति मंच के बृजमोहन गिल ने कहा कि पुलिस केस दर्ज कर जल्द आरोपी गिरफ्तार करे। बसपा के उकलाना हलका अध्यक्ष बलबीर सिंह बौद्ध ने कहा कि पुलिस इसे हल्के में ले रही है और उन्हेें आंदोलन का स्वरूप बड़ा करने पर बाध्य कर रही है। बसपा नेता बलराज सातरोड़िया ने कहा कि पुलिस को सभी आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए। इसके अलावा पीड़ित परिवार को एक सरकारी नौकरी और मुआवजा देना चाहिए।
सरकार और पुलिस के खिलाफ की नारेबाजी
बिठमड़ा के राजबीर का शव सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा था। सोमवार को दलित समाज के लोग सिविल अस्पताल में काफी संख्या में पहुंचे। उन्होंने सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। तीसरे दिन यहां अस्पताल में माहौल तनावपूर्ण बना रहा। डीएसपी राजबीर सैनी और सिटी थाना प्रभारी मंदीप सांगवान पुलिस बल के साथ अस्पताल में पहुंचे थे। वहां मौजूद लोगों में पुलिस के प्रति गहरा आक्रोश था।
तीन बच्चों के सिर से उठा बाप का साया
राजबीर उर्फ डांगी की मौत से उसके तीन बच्चों के सिर से बाप का साया उठ गया है। उसकी पत्नी रमन और तीन मासूम बच्चे भी अस्पताल में आए हुए थे। रमन ने बताया कि उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मृतक की बहन सुमन देवी ने कहा कि जाति विशेष के कुछ लोगों से उनके परिवार को जान का खतरा बना हुआ है। उनकी सुरक्षा की जाए।
चार ग्रामीणों पर केस दर्ज
एडवोकेट रजत कल्सन ने बताया कि राजबीर द्वारा आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने बिठमड़ा के चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने गांव के नरेश, काला, कालूराम और बिंदर के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने और एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इन चारों के खिलाफ मृतक के भाई अशोक ने आज अलग से शिकायत दी। उसने दूसरी शिकायत उकलाना एसएचओ, जांच अधिकारी और अन्य के खिलाफ दी। उस मामले में पुलिस ने अलग से जांच शुरू कर दी है।
अशोक की नियमित जमानत मंजूर
बिठमड़ा के अशोक कुमार को उकलाना थाना पुलिस ने गांव के ही एक युवक से मारपीट के मामले में शामिल तफ्तीश किया। बाद में अदालत ने उसकी नियमित जमानत मंजूर कर ली। उसने शनिवार को कोर्ट में सरेंडर किया था और कोर्ट ने उसकी सोमवार तक की जमानत मंजूर की थी। अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि कोर्ट ने मृतक के भाई अशोक की जमानत मंजूर की है।
पुलिस ने ली राहत की सांस
राजबीर उर्फ डांगी के परिजन एसएचओ समेत छह के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग पर अड़े थे। लेकिन पुलिस ने इस संबंध में केस दर्ज नहीं किया। पुलिस ने सोमवार को चार ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज करने की बात रखी तो परिजन मान गए। उसके बाद चार के खिलाफ केस दर्ज किया तो परिजन शव उठाने पर राजी हो गए। उन्होंने पांच बजे शव उठाया और फिर दाह संस्कार किया।
यह है मामला
उकलाना थाना पुलिस ने बिठमड़ा के अशोक के खिलाफ मारपीट का केस दर्ज किया था। गांव के एक युवक ने उस पर आरोप लगाया था। झगड़ा 12 सितंबर को हुआ था। अशोक झगड़े के बाद घर से फरार हो गया था। आरोप है कि जाति विशेष के कुछ लोग परिजनों पर अशोक को पंचायत में पेश करने का लगातार दबाव बना रहे थे। आरोप है कि अत्यंत दबाव बनाने पर शनिवार को अशोक के भाई राजबीर ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।