अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पराशर की अदालत ने गांव रावतखेड़ा में पिता की हत्या करने के जुर्म में गांव के राजेश उर्फ छोटू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को कोर्ट ने 6000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने पर उसे दो साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने शुक्रवार को मृतक की पत्नी, पुत्रवधू और भतीजे को बरी करते हुए बेटे राजेश को दोषी करार दिया था।
सदर थाना पुलिस ने इस बारे में 5 सितंबर 2015 को केस दर्ज किया था। अदालत में चले अभियोग के अनुसार वारदात वाले दिन रावतखेड़ा में जोहड़ के पास से गांव का 80 साल का बुजुर्ग हजारी लाल गायब हो गया था। वह सुबह जोहड़ पर घूमने गया था कि लौटा नहीं। रावतखेड़ा के मोहन जांगड़ा ने पुलिस को शिकायत देकर कहा था कि हम पांच भाई हैं। हमारे में हजारी सबसे बड़े थे। वह बीते दिन जोहड़ की तरफ घूमने गए थे कि लौटे नहीं। उन्हें शक है कि हजारी का उसके बेटे राजेश उर्फ छोटू ने कुछ अन्य के साथ मिलकर पिकअप डाला वाहन में अपहरण कर लिया है। सदर थाना पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर नामजद राजेश को अगले दिन गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तार करने पर बेटे ने कबूला था जुर्म
पुलिस ने आरोपी राजेश को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो वारदात का खुलासा हो गया था। उसने बताया था कि उसने चचेरे भाई श्यामलाल उर्फ श्यामा और अन्य के साथ मिलकर पहले अपने पिता हजारी का पिकअप में अपहरण किया। उसके बाद उसे एक ढाणी में ले जाकर डंडे से पिटाई कर उसकी हत्या कर दी और फिर अपनी ढाणी में शव को तूड़ी में छुपा दिया। उसने बताया था कि उसने संपत्ति के विवाद को लेकर पिता हजारी की हत्या की और तूड़ी के ढेर में शव दबा दिया। पुलिस ने मौके पर जाकर शव बरामद कर मृतक के बेटे राजेश, पत्नी सोना, पुत्रवधू पूजा और भतीजे श्यामलाल को गिरफ्तार किया था। अदालत ने शुक्रवार को राजेश को दोषी मानकर बाकी तीन आरोपियों को बरी कर दिया था।