पुलिस ने शनिवार को आश्रम की दो लड़कियों के ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज करवाए हैं। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने एकांत में लड़कियों के बयान दर्ज किए। लड़कियों में से एक नाबालिग ने बयानों में लिखवाया है कि उसकी आश्रम के ही लड़के के साथ फ्रेंडशिप थी। उसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ।
दूसरी लड़की को पुलिस बालिग बता रही है, जिसने कहा है कि वह भी आश्रम में रहने वाले एक लड़के से प्रेम करती है। जो कुछ भी हुआ उसकी सहमति से हुआ है और वे दोनों शादी भी करना चाहते हैं। दोनों लड़कियों ने कहा है कि वे उनके खिलाफ कोई कारवाई नहीं चाहती। लड़कियों के इस बयान के बाद दर्ज केस रद हो सकता है।
आश्रम में वापस जाने के लिए भी लिखा
ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों में लड़कियों ने कहा है कि वे वापस आश्रम जाना चाहती हैं। उन्हें आश्रम भेजा जाए। उन्होंने कहा है कि आश्रम हमारे घर जैसा है। उन्हें वहां कोई दिक्कत नहीं।
शैशव कुंज से लड़कियों को लेकर आई पुलिस
ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयान दर्ज करवाने के लिए महिला थाना प्रभारी नन्ही देवी, एएसआई सरोज सहित पुलिस की एक टीम पहले शैशव कुंज गई। वहां से पुलिस दोनों लड़कियों को साथ लेकर जेएमआईसी मुकेश कुमार की अदालत में पहुंची।
पॉक्सो एक्ट की उल्लंघना
जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुनीता यादव ने पुलिस कार्रवाई पर फिर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब टीम शैशव कुंज गई तो दो पुलिस कर्मी वर्दी में थे। जबकि ऐेसे मामलों में पुलिस को वर्दी में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी लड़कियों से डीएसपी से पूछताछ करने का मामला आया था।
स्टेटमेंट बनेगी केस का आधार
सीनियर एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल का कहना है कि अगर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने दोनों लड़कियों ने अपने बयानों में कहा है कि उनके साथ कुछ नहीं हुआ और जो खुद को बालिग साबित कर रही है।
उसने कहा मेरी सहमति से हुआ तो ऐसा नहीं कि केस कैंसल हो जाएगा। क्योंकि ऐसे मामलों में पुलिस की स्टेटमेंट भी मायने रखती है। यह देखा जाएगा कि पहले पुलिस के सामने लड़कियों ने क्या स्टेटमेंट दी और अब क्या स्टेटमेंट दे रही हैं। अगर लड़कियों ने स्टेटमेंट बदली है तो वह किन परिस्थितियों में बदली है।