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गोली चलाने के मामले में दोषी ठहराए सुमित को 7 साल की कैद व 6 हजार जुर्माना

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार। गोली चलाने के एक मामले में दोषी ठहराए गए सुमित उर्फ अली को एडीजे देशराज चालिया की अदालत ने वीरवार को 7 साल की कैद व 6 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सुमित पहले से सजायाफ्ता है और 10 साल की सजा काट रहा है। अदालत ने साफ किया है कि दोषी पहले वाली सजा काटनी होगी और उसके पूरा होने के बाद इस मामले की सजा शुरू होगी। अदालत ने सुमित को 11 फरवरी को दोषी करार दिया था।
मामले के अनुसार शांति नगर निवासी विजय ने वर्ष 2016 में पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वर्ष 2014 के गोली चलाने के मामले में वह गवाह था। इस मामले में गवाही न देने का उस पर दबाव बनाया जा रहा था, जिसको लेकर बदमाशों द्वारा लगातार उसे धमकियां दी जा रही थीं। 16 अप्रैल 2016 की रात को वह जलेबी चौक स्थित अपनी इनवर्टर बैटरी की दुकान से घर लौट रहा था। शांति नगर टंकी के पास सुमित उर्फ अली व अन्य ने उस पर जानलेवा हमला किया और फायर कर दिया। उसे एक गोली छाती में लगी थी। पुलिस ने विजय के बयान पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सुमित को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में एडीजे देशराज चालिया की अदालत ने 11 फरवरी को सुमित को दोषी करार दिया था। वीरवार को अदालत ने सुमित को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत 7 साल और 5 हजार रुपये तथा आर्म्स एक्ट के तहत 3 साल और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर उसे 1 साल तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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पहले 10 साल की सजा पूरी होने के बाद शुरू होगी 7 साल वाली सजा
सुमित पहले से भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत सजा याफ्ता कैदी है। एडीजे अजय पराशर की अदालत ने उसे हत्या प्रयास के मामले में 10 साल की सजा सुनाई हुई है। एडीजे देशराज चालिया की अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि सुमित पहले अपनी पूर्व की 10 साल की सजा को पूरी करेगा और उसके बाद वर्तमान 7 साल की सजा शुरू होगी।
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