अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
एसीजेएम सुरेंद्र कुमार की अदालत ने तत्कालीन मंत्री सावित्री जिंदल की कोठी में घुसने का प्रयास करने और रोड जाम कर सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने का मुकदमा वापस लेने संबंधी सरकारी पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इससे भाजपा विधायक डॉ. कमल गुप्ता और अन्य आरोपियों को झटका लगा है। वे ट्रायल फेस करेंगे।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान 12 जून 2013 को भाजपा और हजकां कार्यकर्ताओं ने दिल्ली रोड पर तत्कालीन मंत्री सावित्री जिंदल की कोठी के सामने अपनी मांगों को लेकर रास्ता जाम किया था। भीड़ में से किसी ने पुलिसकर्मियों पर काले तेल की बोतल उड़ेल दी थी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मंत्री की कोठी में घुसने का प्रयास किया था। डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा के नेतृत्व में वहां पुलिस बल तैनात था। पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज कर कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। सिविल लाइन पुलिस ने सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, रोड जाम करने, कोठी में घुसने का प्रयास करने और तोड़-फोड़ का केस दर्ज किया था। वह केस अब विचाराधीन है। इस मुकदमे में दो मई को गवाही होगी। सरकारी पक्ष ने कोर्ट में वह केस वापस लेने संबंधी याचिका लगाई थी, जो खारिज कर दी गई।
मामले में ये हैं आरोपी
इस मुकदमे में भाजपा विधायक डॉ. कमल गुप्ता और अन्य आरोपियों को झटका लगा है। पुलिस ने डॉ. कमल गुप्ता के अलावा डॉ. योगेश बिदानी, रवि सैनी, अरुण कुमार, जैन गली के प्रवीण, मंदीप मलिक, प्रकाश अग्रवाल, राजेंद्र सपड़ा, सुजीत कुमार, बिजेंद्र, रणधीर पनिहार, रामफल बूरा, सूबेसिंह आर्य, सुभाष टांक, रामनिवास राड़ा, मुकेश गौड़, प्रदीप, अजय सिंधु, कर्णसिंह रानोलिया, जोगीराम सिहाग, फूलकुमार मात्रश्याम, पवन खारिया और नरेश नैन को आरोपी बनाया था।
डीएसपी के खिलाफ मुकदमा लिया वापस
इस प्रकरण में सिविल लाइन थाना पुलिस ने डॉ. गुप्ता और अन्य को आरोपी बनाया था। दूसरी तरफ डॉ. गुप्ता ने डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा और 40-50 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। एडवोकेट श्याम गोदारा ढांडा का पक्ष कोर्ट में रख रहे थे। वह याचिका डॉ. गुप्ता ने पिछले दिनों वापस ले ली, लेकिन डॉ. गुप्ता और अन्य पर दर्ज मुकदमा वापस लेने संबंधी याचिका एसीजेएम कोर्ट ने खारिज कर दी।