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भाटला प्रकरण सुलझाने को प्रशासन के बाद अब भाजपा नेता पहुंचे हांसी, नहीं निकला कुछ हल

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अमर उजाला ब्यूरो
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हांसी।
प्रशासन के बाद भाटला प्रकरण को सुलझाने व भाईचारा बरकरार रखने के लिए हांसी के स्थानीय विश्राम गृह में आए भाजपा नेता भी खास नहीं कर पाए। करीब दो घंटे तक दोनों पक्षों के साथ चली बातचीत के बाद भी कुछ हल नहीं निकल पाया। बातचीत के दौरान दलित पक्ष अपनी बातों पर अड़े हुए थे तो सवर्णों ने भी अपना पक्ष रखा। पार्टी हाईकमान के आदेश पर सुनवाई करने आए विधायक डॉ. कमल गुप्ता व भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पूनिया ने कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत की है, जो भी बातें सामने आई हैं, वह सीएम के समक्ष रख दी जाएगी। मामले को सुलझाने में समय लग सकता है। अगर जरूरत पड़ी तो दोनों पक्षों को फिर से बुलाया जाएगा।
करीब सवा 11 बजे विधायक कमल गुप्ता व भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पूनिया स्थानीय विश्राम गृह में पहुंचे। जहां उन्हें दलित पक्ष को फोन कर मौके पर बुलाना पड़ा। एडवोकेट रजत कल्सन की अगुवाई में पहुंचे दलित पक्ष के लोगों ने अपना पक्ष रखा। इस दौरान एसडीएम राजीव अहलावत, डीएसपी नरेंद्र कादियान, सिटी थाना प्रभारी उदयभान सहित भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रवीण बंसल, पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के डायरेक्टर अशोक कनौजिया, प्रेम वर्मा, राजेश ठकराल व अन्यों को साथ वाले कमरे में बिठाया गया। दलितों ने अपने बयान में डीएसपी व एसएचओ सहित कई पुलिस अधिकारियों के तबादले सहित उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने भाजपा नेताओं को पुलिस अधिकारियों के नाम लिख कर देते हुए कहा कि उक्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर उनका तबादला किया जाए। इसके अलावा जितने भी दलितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उसे खारिज किया जाए। उन्हें मुआवजा दिलवाया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अगर उनका सामाजिक बहिष्कार खत्म हो जाता है तो वह भाईचारा निभाने के लिए तैयार है। उधर सवर्ण पक्ष के लोगों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गांव में सामाजिक बहिष्कार जैसी कोई बात नहीं है। गांव में चार-पांच लोग इस तरह के हैं, जो माहौल खराब कर रहे हैं। वह हर प्रकार से भाईचारा बनाना चाहते हैं।
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दर्ज किए गए मुकदमों को खारिज किया जाए
मीडिया से बातचीत में दलितों ने कहा कि उनकी मांग है कि उनके खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को खारिज किया जाए। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वह भाईचारा बनाए रखने के लिए तैयार है, लेकिन पहले उनकी मांग पूरी की जाए। अगर यहां उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो इसके बाद वह आगे की रूपरेखा तैयार करेंगे।
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यह है मामला
भाटला गांव में सार्वजनिक हैंडपंप से पानी को लेकर 15 जून 2017 को दो समुदायों के लोगों के बीच विवाद हो गया था। मामले ने जातीय रंग पकड़ लिया। पुलिस ने इस संबंध में दलितों की शिकायत पर कुछ सवर्णों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। इसी बीच मामले ने तूल तब पकड़ लिया, जब गांव के एक व्यक्ति द्वारा बंदी की घोषणा की वीडियो वायरल हो गई। दलितों ने आरोप लगाया कि उनका गांव में सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है। आज भी गांव में सामाजिक बहिष्कार बरकरार है। इसके बाद मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट तक जा पहुंचा, जहां से कई बार प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में पहुंच कर स्थिति का हाल-चाल जाना, लेकिन बात न बनने पर अब पार्टी हाईकमान की तरफ से भाजपा नेताओं द्वारा इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
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