गैंगवार के मास्टर माइंड को जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाई पुलिस
सिवानी मंडी। अदालत से प्रोडक्शन वारंट मिलने के बाद सिवानी पुलिस जिला जेल में बंद गिरोह के मुख्य सदस्यों व योजना के मास्टर माइंड सोनू मिठ्ठी व सुनील खैरू को सिवानी ले आई। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 6 दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया। इस मामले में पहले से गिरफ्तार शूटरों ने खुलासा किया है कि उन्होंने वारदात में प्रयुक्त किए गए हथियार मध्यप्रदेश से खरीदे थे। वे जेल से पेशी के लिए सिवानी अदालत में लाए गए कैदी और अपने मुखियाओं के जानी दुश्मन बहादुर व कालिया को मौत के घाट उतारना चाहते थे लेकिन उनका निशाना चूक गया जिसकी वजह से हवलदार भागीरथ को गोली जा लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस पूरे प्रकरण को लेकर अमर उजाला ने 9 मई के अंक में पहले ही खुलासा कर दिया था कि इस पूरे प्रकरण की प्लानिंग जिला जेल भिवानी में बनाई गई थी।
गौरतलब है कि गत 7 मई को तहसील परिसर में हुई गैंगवार में जेल से पेशी के लिए आए कैदी बहादुर और कालिया बाल-बाल बच गए थे। इस गैंगवार में एक हवलदार को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा जबकि एक एएसआई गौरीशंकर घायल हो गया था। हादसे के बाद 2 शूटर पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे। पुलिस ने अदालत से प्रोडक्शन वारंट मांगा और वीरवार को दोनों आरोपियों को जेल से सिवानी लाया गया। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच इन्हें अदालत में पेश किया जहां से उन्हें 6 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। मामले के जांच अधिकारी विद्याधर पिलानिया ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपियों से उनके अन्य साथियों के अलावा पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। जैसे-जैसे नामों का खुलासा होगा उसी प्रकार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मध्य प्रदेश के इंदौर से खरीदे थे हथियार
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वारदात में प्रयोग किए हथियार उन्होंने गिरोह के ही एक साथी की तरफ से मुहैया करवाई गई राशि से मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से खरीदे थे। वहां से वे 1.52 लाख रुपये में 3 पिस्तौल व आठ सौ रुपये प्रति कारतूस के हिसाब से 6 मैगजीन व 24 कारतूस खरीद कर लाए थे। पहले से पुलिस रिमांड पर चल रहे मनजीत ने बताया कि इस पूरी योजना को भिवानी जेल में बंद सुनील खैरू और सोनू मिठ्ठी ने ही अंतिम रूप दिया था और सोमवार को पेशी का दिन चुनकर उन्हें उनके जानी दुश्मन बहादुर और कालिया को मौत के घाट उतारने के लिए भेजा था। हमले के दौरान उनका निशाना चूक गया औैर हवलदार उनकी गोली का शिकार हो गया।
इसलिए रची मौत के घाट उतारने की योजना
सोनू व सुनील को लगने लगा था कि कालिया जल्द ही जेल से छूटने वाला है और बाहर निकलने के बाद कहीं वह भिवानी जिला और राजस्थान के क्षेत्र में अपनी मजबूत जड़े बना लेगा। उनके जेल में रहने की वजह से कहीं उनका साम्राज्य और वजूद समाप्त ना हो जाए इसलिए उन्होंने कालिया और बहादुर को जान से मारने की योजना जेल में ही तैयार कर ली थी। 2 माह से चल रही इस योजना को आखिरकार गत 7 मई को अंजाम दिया गया लेकिन सोनू व सुनील गिरोह के सदस्य इसमें कामयाब नहीं हो सके।
कई संदिग्ध है पुलिस के निशाने पर
गैंगवार के इस संगीन मामले में सिवानी, बहल व राजस्थान क्षेत्र के कई संदिग्ध पुलिस की रडार पर है। पुलिस ऐसे लोगों के बारे में जानकारियां जुटा रही है। बताया जाता है कि गिरोह के सदस्यों से लेकर मुखियाओं तक पुलिस रिमांड पर आ जाने के बाद इस प्रकरण में शामिल लोग भूमिगत हो गए है।