हिसार। स्वच्छता सर्वे में बेहतर अंक पाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने पैसा पानी तरह बहाया लेकिन शहर के हालात फिर भी नहीं सुधरे। स्वच्छता के प्रचार-प्रसार से लेकर सफाई से संबंधित संसाधन जुटाने के लिए भी लाखों खर्च किए। हर महीने सफाई पर करीब 2.40 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है, मगर स्थिति यह है कि स्वच्छता सर्वे में शहर की रैंकिंग में सुधार की बजाय गिरावट आ रही है। नगर निगम की राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग 60 पायदान गिरी है।
बता दें कि स्वच्छता सर्वे 2021 के परिणाम को नगर निगम की एक से 10 लाख आबादी की श्रेणी में देश भर में 165वीं रैंकिंग आई है, जबकि वर्ष 2020 में नगर निगम देेश भर में 105वें स्थान पर था।
हर माह स्वच्छता पर होने वाले खर्च का ब्योरा
सफाई का ठेका 10.66 लाख रुपये
तेल का खर्च 13 लाख रुपये
कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों पर तैनात चालकों का वेतन 12 लाख रुपये
लीगेसी वेस्ट के निपटान का खर्च 54 लाख
स्थायी व पे-रोल पर तैनात सफाई कर्मचारियों के वेतन पर खर्च 1.50 करोड़ रुपये
सफाई के संसाधन
सफाई कर्मचारी 825
नियमित 173
पे-रोल 532
दैनिक वेतन भोगी 6
पार्ट टाइम 9
ठेके पर कार्यरत 70
टाटा एस 45
ट्रैक्टर-ट्रॉली 48
जेसीबी 2
रिक्शा रेहड़ी 150
साउथ बाईपास बना डंपिंग स्थल
शहर की सफाई व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर का साउथ बाईपास डंपिंग स्थल बनकर रह गया है। प्रतिदिन बाईपास के किनारे मकानों के मलबे सहित अन्य कचरा डाला जाता है। निगम प्रशासन भी कभी-कभार इनके चालान करके अपनी ड्यूटी पूरी कर देता है। मंगलवार को भी साउथ बाईपास पर एक ट्रैक्टर चालक द्वारा मकान का मलबा डाल दिया गया। हालांकि नगर निगम की तरफ से सीएंडडी वेस्ट के लिए सीएंडडी वेस्ट प्लांट बनाया हुआ है, लेकिन निगम की सख्ती न होने के कारण शहर में खुले में ही यह वेस्ट डाला जा रहा है।
तीन दिन से घरों से नहीं उठ रहा कचरा
पार्षद अमित ग्रोवर मंगलवार को डीएमसी अपर्वू चौधरी के पास पहुंचे। इस दौरान उन्होंने डीएमसी से कहा कि सेक्टर 13 व 16-17 में तीन दिनों से घरों से कचरा एकत्रित नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा प्वाइंटों से भी कचरे का उठान नहीं किया जा रहा है।
इस पर डीएमसी ने तुरंत सफाई शाखा के अधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया और व्यवस्था सुधारने के आदेश दिए। यही नहीं डीएमसी ने तीन दिन पहले अर्बन एस्टेट से डीसी कॉलोनी को जाने वाले रोड पर लगे कचरे के ढेर को साफ करवाने के लिए कर्मचारियों को आदेश दिए थे, लेकिन उसके बाद ही वहां सफाई नहीं की गई। बता दें कि इस सेक्टर की सफाई व्यवस्था को निगम ने ठेके पर दिया हुआ है। हालांकि ठेके की अवधि पूरी हो चुकी है। चूंकि नया टेंडर अलॉट नहीं हुआ है, जिस कारण से निगम ने तब तक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी हुई है।
निगमायुक्त शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने को लेकर काफी गंभीर है। मगर उनके अधीनस्थ अधिकारी व कर्मचारी अपने काम के प्रति लापरवाह हैं, जिस कारण से शहर की यह स्थिति बनी हुई है। इस सर्वे के परिणाम में जहां-जहां कमियां मिली हैं, निगम प्रशासन को उन कमियों को दूर करना चाहिए। - अमित ग्रोवर, पार्षद, वार्ड 14
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