नागरिक अस्पताल प्रशासन द्वारा अस्पताल के मुख्य द्वार के पास बने जर्जर कमरे की मरम्मत कराई जा रही है ताकि खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों को वहीं पर चेक किया जा सके। कोरोना के डर से लोग सामान्य खांसी-जुकाम होने पर भी चेकअप करवाने के लिए अस्पताल में पहुंच रहे है। इसी वजह से नागरिक अस्पताल में फिजिशियन ओपीडी पिछले दो दिनों में 400 से ज्यादा हो गई है। पहले सामान्य दिनों में 200 की ओपीडी थी।
डॉ. जया ने बताया कि डॉक्टरों द्वारा अस्पताल के मेन गेट के बाहर ही एक फ्लू क्लीनिक लगाकर खांसी-जुकाम वाले मरीजों को बाहर ही चेक किया गया। यदि कोई भी मरीज कोरोना संदिग्ध मिले तो उसे सीधा उसे आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया जा सके। इसी तरह से शुक्रवार को काफी मरीजों को चेक किया गया।
डॉक्टरों की अलग-अलग जगह पर ड्यूटियां की निर्धारित
नागरिक अस्पताल में चार फिजिशियन है, जिनमें से एक डॉक्टर छुट्टी पर था। इनमें से डॉ. अजित लाठर को रैपिड एक्शन टीम में नोडल ऑफिसर बनाया गया है जो सूचना मिलने पर प्राइवेट अस्पताल या मरीज के घर पर अपनी टीम के साथ पहुंचकर चेक कर रहे हैं। वहीं, नागरिक अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड का नोडल ऑफिसर डॉ. रामअवतार को बनाया गया है। डॉ. ज्ञानेंद्र और डॉ. अजय चुघ ओपीडी में आने वाले मरीजों को चेक कर रहे हैं।
अब तक 27 मरीज चेकअप के लिए पहुंचे
नागरिक अस्पताल में अब तक कोरोना संदिग्ध लगभग 27 मरीज चेकअप के लिए आ चुके है जो किसी अन्य राज्य, देश की यात्रा से आए है या किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में आए हों। लेेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा अभी तक केवल एक ही मरीज का ब्लड सैंपल लिया है, जिसकी निगेटिव रिपोर्ट आने पर उसे घर भेज दिया गया।
मॉकड्रिल कर स्टाफ को दी जानकारी
नागरिक अस्पताल में शुक्रवार सुबह डॉक्टरों की टीम ने अस्पताल स्टाफ, एंबुलेंस चालक व ईएमटी को मॉकड्रिल के जरिये जानकारी दी कि कोरोना से संदिग्ध किसी मरीज को किस तरह से उपचार दिया जाना है और उपचार से पूर्व किसी तरह की सावधानियां बरतनी हैं। उस दौरान डॉक्टरों ने बताया कि किसी भी कोरोना संदिग्ध मरीज के पास जाने से पूर्व उन्हें सबसे पहले फुट मास्क उसके बाद एप्रेन फिर ग्लब्स फिर हेड मास्क उसके बाद मास्क और अंत में गोगल डालनी हैं। डॉक्टरों ने बताया कि जब इस ड्रेस को उतारना है तो प्रक्रिया उल्टी शुरू होगी।
प्राइवेट अस्पताल नहीं ले सकेंगे सैंपल
डॉ. जया ने बताया कि सरकार की अवहेलना करने वाले प्राइवेट अस्पतालों को अस्पताल प्रशासन की ओर से नोटिफिकेशन जारी की गई है। जिले में लगभग 300 प्राइवेट अस्पताल और उनमें 100 वेंटिलेटर है जिन्हें आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दिए जा चुके है। कोई भी प्राइवेट अस्पताल संचालक किसी भी कोरोना संदिग्ध मरीज का ब्लड सैंपल नही ले सकेंगे इस बारे में भी निर्देश जारी किए जा चुके है।
प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना (कोविड-19) को महामारी घोषित करने के बाद महामारी रोग अधिनियम-1897 के तहत इसके संबंध में व्हाट्सएप ग्रुप अथवा अन्य सोशल मीडिया माध्यमों की सूचनाओं को आगे फॉरवर्ड न करें। कोई भी व्यक्ति अफवाह व भ्रामक प्रचार करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। अधिनियम के अनुसार जिले के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना रोग के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए अपने परिसर में फ्लू कॉर्नर बनाए जाना अनिवार्य है। कोई भी निजी लेबोरेटरी कोविड-19 का टेस्ट सैंपल लेने के लिए अधिकृत नहीं है। इस प्रकार के सभी सैंपल भारत सरकार की गाइडलाइंस के अंतर्गत ही लिए जा सकते हैं जिन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा नामित डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर के माध्यम से निर्धारित लैब में ही भेजा जाएगा।
डॉ. प्रियंका सोनी, उपायुक्त, हिसार