कोरोना वायरस को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुख्ता प्रबंध की बात कही जा रही है। अस्पतालों में जाने वाले प्रत्येक मरीज को कोरोना से बचाव व सावधानियों बारे भी जागरूक किया जा रहा है। इन सावधानियों में लोगों को बार-बार साबुन से या सेनिटाइजर से हाथ धोने की सबसे ज्यादा हिदायत दी जा रही है।
सिर्फ चिकित्सकों के ही कमरों में सेनिटाइजर
नागरिक अस्पताल में स्थिति कुछ ओर ही है। यहां मौखिक रूप से तो मरीजों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन यहां आने वाले मरीजों व तीमारदारों के लिए कुछ विशेष प्रबंध दिखाई नहीं दे रहे। इसका एक उदाहरण अस्पताल में बने शौचालयों में न तो हाथ धोने के लिए साबुन हैं, न हीं कोई लिक्विड। वहीं अस्पताल में अगर सेनिटाइजर रखा गया है तो वह सिर्फ चिकित्सकों के ही कमरों में है। अस्पताल में चिकित्सकों के कमरों के बाहर किसी प्रकार का सेनिटाइजर या मास्क नहीं पड़ा। ऐसे में अस्पताल में आने वाले मरीजों या तीमारदारों को बाहर से ही मास्क व सेनिटाइजर खरीदकर लाने पड़ रहे हैं।
अस्पताल के शौचालयों में भी नहीं व्यवस्था
नागरिक अस्पताल में करीब 15 शौचालय हैं, जिनमें न तो साबुन की व्यवस्था है और न ही हैंडवॉश लिक्विड की। इसके अलावा कई शौचालयों की तो नल भी टूटी हालत में हैं। वहीं अस्पताल में पीने वाले पानी के स्थान पर भी गंदगी का आलम है। अस्पताल में इमरजेंसी के बाहर, वार्ड 11, वार्ड 13, मलेरिया विभाग के बाहर बने किसी भी शौचालय के अलावा सोसायटी ऑफिस के पास बने शौचालय में भी साबुन या हैंडवॉश लिक्विड की व्यवस्था नहीं है। वहीं वार्ड 11 में तो बीड़ी व जर्दे के भी ढेर लगे पड़े हैं।
अस्पताल में सफाई व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सभी शौचालयों में हैंडवॉश भी रखवाए जा रहे हैं। बैनर लगाकर लोगों को संदेश भी दिया जा रहा है कि हैंडवॉश के बाद ही अस्पताल में प्रवेश करें।
- डॉ. राजीव, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार
नागरिक अस्पताल प्रशासन द्वारा मेन गेट पर बने फ्लू क्लीनिक को ट्राइएज बनाया जाएगा और फ्लू क्लीनिक परिसर के अंदरूनी आइसोलेशन वार्ड के सामने बनाया जाएगा। बुधवार से खांसी, जुकाम, बुखार संबंधित मरीजों की प्राथमिक जांच ट्राइएज में ही की जाएगी। उसके बाद कोरोना संदिग्ध होने पर उसे अंदरूनी आइसोलेशन वार्ड के सामने बने फ्लू क्लीनिक में भेजा जाएगा और वहां पर उसकी पूरी जांच की जाएगी और यही पर दवा भी दी जाएगी। नागरिक अस्पताल प्रशासन द्वारा दो टीम गठित की गई है, जिसमें दो-दो डॉक्टर और नर्स स्टाफ व अन्य कर्मचारी शामिल होंगे। इनमें से एक टीम ट्राइएज में रहेगी और दूसरी टीम नए फ्लू क्लीनिक में रहेगी। वहीं मंगलवार शाम करीब चार बजे तक खांसी, जुुकाम, बुखार संबंधित 75 मरीज फ्लू क्लीनिक में जांच करवाने के लिए पहुंचे और फिजिशियन की ओपीडी भी लगभग 400 रही।
तबीयत में सुधार के बाद मेडिकल छात्रा को भेजा घर
डॉक्टरों द्वारा चीन से लौटी युवती की तबीयत में सुधार के बाद उसे घर भेज दिया गया और उसका कोरोना व स्वाइन फ्लू का सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया है। वहीं हांसी निवासी महिला और जिले के एक गांव निवासी युवक की कोरोना व स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई है, जिससे डॉक्टरों द्वारा युवक को छुट्टी दे दी है।
लेजर थर्मामीटर से होगी बुखार की जांच
अब लेजर थर्मामीटर से बुखार की जांच की जाएगी। इस मरीज के तापमान का सही पता लगा लिया जाएगा। उधर, शहर की प्रयास- एक पहल और एनजीओ दो सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर जिला नागरिक अस्पताल को हैंडवॉश, सेनिटाइजर, ग्लव्स, मास्क, किट आदि वस्तुएं दान की।
व्हाट्स एप पर एक युवक की मौत की फैली अफवाह
व्हाट्स एप ग्रुप पर फैली अफवाह ने जिला स्वास्थ्य विभाग को सकते में ला दिया कि महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण से जिस मरीज की मौत हुई है, वह शहर की एक कॉलोनी का निवासी है। इस पर स्वास्थ्य और जिला प्रशासन दोनों सतर्क हो गए और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार सुबह नौ बजे ही मामले की जांच शुरू कर दी। शाम करीब तीन बजे तक शहर की उस कॉलोनी में घर-घर जाकर जांच की, जहां पहुंचने पर पता चला कि मृतक हिसार जिले का नहीं, बल्कि किसी अन्य जगह का निवासी है। बायोलॉजिस्ट रमेश पूनिया ने बताया कि सूचना मिलने के बाद उन्होंने आशा वर्कर, पार्षद के जरिये कॉलोनी का जायजा लिया गया। अब पुलिस को सतर्कता बरतने के लिए कह दिया गया है और इस बारे में कॉलोनी वासियों को भी सूचित किया गया है कि ऐसी कोई सूचना मिले तो वह स्वास्थ्य विभाग को सूचित अवश्य करें।
वर्जन
वह एक अफवाह थी। उनकी ओर से शहर की पूरी कॉलोनी में जांच कर ली गई है और शहर में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसकी मौत कोरोना से महाराष्ट्र में हुई है।
- डॉ. जया गोयल, डीप्टी सिविल सर्जन, हिसार