बुधवार 20 अगस्त, 1947 को 5 नए सदस्यों ने प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिनमें हरियाणा क्षेत्र से चौधरी निहाल सिंह तक्षक शामिल थे। उन्होंने देसी रियासतों में डाक समस्या से संबंधित संशोधन प्रस्ताव रखा था। पानीपत के मूल निवासी देशबंधु गुप्ता, विक्रम लाल सोपानी और बख्शी टेक चंद भी भारतीय संविधान सभा के सदस्य थे।
1947 में 20 से 25 जनवरी को हुए द्वितीय अधिवेधन में पहली बार हरियाणा की आवाज सुनाई पड़ी थी। संविधान सभा के सदस्य पंडित श्रीराम शर्मा भी रोहतक क्षेत्र से थे। संविधान सभा के अधिवेशन में 1 दिसंबर 1948 को पं. ठाकुर दास भार्गव ने विधानसभा के मसौदे पर वाद-विवाद में और गौवध पर अपना पक्ष रखा था। इसी के साथ शांतिपूर्ण सम्मेलन करने के पर भी उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए थे।
संविधान सभा में हरियाणा के नौ लोग थे। उनमें हिसार निवासी पं. ठाकुर दास भार्गव ने गौ हत्या व शराबबंदी पर लगाम लगाने के लिए अपनी आवाज उठाई थी। उन्होंने नीति निर्देशक सिद्धांतों के बारे में अपनी राय रखी थी। दादरी के रहने वाले निहाल सिंह तक्षक का मानना था कि लोगों को उनके आर्थिक मौलिक अधिकार दिए जाने चाहिए। चौ. सूरजमल का मानना था कि ग्रामीण इलाकों का विकास किया जाना चाहिए और शहर व गांव के बीच की दूरी को खत्म किया जाना चाहिए। लाला अचिंतराम गांधीवादी सोच के व्यक्ति थे। उनका मानना था कि देश में पंचायती प्रजातंत्र होना चाहिए।
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