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Ram Mandir: अयोध्या में होगा संत परंपराओं का संगम, राम मंदिर निर्माण को जीवन की बड़ी उपलिब्ध बता रहे संत

Wed, 03 Jan 2024 10:40 AM IST
नवीन दलाल अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पहुंच रहे संतों को निमंत्रण पत्र के साथ एक पत्र भी भेजा गया है, जिसमें उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है। संत अपना आधार कार्ड साथ रखेंगे। मोबाइल, पर्स, झोली, चंवर, सिंहासन, निजी पूजा के ठाकुर अथवा गुरु पादुकाएं कार्यक्रम स्थल पर नहीं ले जा सकेंगे।
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स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज और बाबा हरि नाम दास - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हरियाणा की कई संत परंपराओं का संगम दिखाई देगा। समारोह में महानिर्माणी अखाड़ा दसनामी, जूना अखाड़ा, उदासीन अखाड़ा, सरस्वती योग तीर्थ, आर्य समाजी, नामधारी मुखी आदि परंपराओं के संत शामिल होंगे।

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लंबे संघर्ष के बाद कार्य पूरा हुआ: स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित किए गए चरखी दादरी के दंडी आश्रम के स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण का कार्य पूरा हुआ है। यह जीवन की बड़ी उपलब्धि होने के साथ समाज को सही मार्ग दिखाने में सहायक होगा।

प्रभु राम का जीवन धर्म को समझने का सरलीकरण : बाबा हरिनाम दास
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित किए गए सिरसा के उदासीन डेरा बाबा भूमन शाह के प्रमुख बाबा हरिनाम दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम साक्षात धर्म स्वरूप हैं। प्रभु राम का जीवन धर्म को समझने का सरलीकरण है। जैसे पुत्र, शिष्य, भाई, पति, मर्यादा योद्धा कैसा हो ये प्रभु राम से सीखें। प्रभु राम के मंदिर का निर्माण जीवन की बड़ी उपलब्धि है।
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प्राण प्रतिष्ठा में पहुंच रहे संतों को सलाह
अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पहुंच रहे संतों को निमंत्रण पत्र के साथ एक पत्र भी भेजा गया है, जिसमें उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है। संत अपना आधार कार्ड साथ रखेंगे। मोबाइल, पर्स, झोली, चंवर, सिंहासन, निजी पूजा के ठाकुर अथवा गुरु पादुकाएं कार्यक्रम स्थल पर नहीं ले जा सकेंगे। कार्यक्रम स्थल पर सुबह 11 बजे से पहले प्रवेश करेंगे।

कार्यक्रम तीन घंटे चलेगा। कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने तथा वापस आने के लिए एक किलोमीटर पैदल करना होगा। एक निमंत्रण पर केवल एक व्यक्ति का ही प्रवेश कार्यक्रम स्थल पर होगा। संतों के सुरक्षाकर्मी भी कार्यक्रम स्थल से बाहर रहेंगे। प्रधानमंत्री के मंदिर परिसर से बाहर चले जाने के बाद ही संत रामलला के दर्शन कर सकेंगे।

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