पुष्पा कांप्लेक्स स्थित दिल्ली रोड पर शांति अस्पताल के कंपाउडर 20 वर्षीय गोविंद का गाड़ी सवार चार लोग अपहरण कर ले गए।
पहले वह उसे अस्पताल के ऊपर बने कमरे से बुलाकर लाए और पीटते हुए आसमानी रंग की कार में डालकर ले गए। घटना ठीक पौने चार बजे कि है।
लोग जब तक समझ पाते अपहरण करने वाले उसे जिंदल चौक की तरफ लेकर फरार हो गए। आरंभ में आसपास के मार्केट के लोगों ने इसे आपसी मामला समझा मगर जब डॉक्टर व अन्य स्टाफ को मामले के बारे में पता चला तो पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। शहर को चारों तरफ से नाकाबंदी करवा दी। करीब ढाई घंटे बाद गाड़ी सवार युवक उसे बस स्टैंड के पास छोड़कर चले गए।
अपहृत ने डॉक्टर के पास किया फोन
अपहरण के कुछ समय बाद गोविंद ने अस्पताल के डॉक्टर केवी सिंह के पास फोन किया। उसने कहा कि सर मुझे अपहरणकर्ता जिंदल चौक के पास छोड़ गए।
युवक इसके बाद भी दो घंटे तक अस्पताल नहीं पहुंचा। अस्पताल का स्टाफ व गोविंद का भाई राजेश उसे ढूंढता रहा लेकिन वह नहीं मिला। सीआईए की टीम सहित सिविल लाइन थाना पुलिस उसे ढूंढती रही।
मामले के बारे में जब पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस असमंजस में पड़ गई। सिविल लाइन थाना पुलिस की पीसीआर पहले डाबड़ा पुल के नीचे स्थित शांति अस्पताल में पहुंची।
वहां पहुंचकर पता चला कि ऐसा कोई मामला नहीं तो पुलिस जिंदल चौक स्थित शांति अस्पताल पहुंची। वहां भी उन्हें कोई ऐसा मामला नहीं मिला। आखिर में पुलिस पुष्पा कांप्लेक्स स्थित शांति अस्पताल में पहुंची।
गोविंद बोला सहयोगी वापस मांगे थे रुपये
गोविंद ने बताया कि एक महिला साथी उसके साथ अस्पताल की लैब में काम करती है। उसने उसे दो हजार रुपये उधार दिए हुए हैं। गोविंद के अनुसार उसने महिला साथी के पास कॉल कर दी।
कंपाउडर का कहना है कि फोन महिला के परिजनों ने उठा लिया। उन्हें गलत फहमी हो गई और उन्होंने ऐसा कर दिया। जब वे उसे गाड़ी में डालकर ले गए तो उसने उन्हें पूरा मामला बताया और वे गलती मानते हुए उसे बस स्टैंड के पास छोड़कर चले गए।
युवक ने बताया कि अपहरण करने वाले पहले उसे तोशाम रोड जिंदल चौक के आसपास घुमाते रहे। उन्होंने ही डॉक्टर के पास कॉल करवाई थी कि वे उसे जिंदल चौक पर छोड़कर चले गए। बाद में वे उसे बस स्टैंड छोड़कर चले गए थे।