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Hisar News: दावा-वरोआ माइट की होगी रोकथाम, रसायन मुक्त शहद मिलेगा

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एचएयू के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज के साथ वैज्ञानिक। 
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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) ने मधुमक्खी पालन के बेहतर प्रबंधन के लिए एक नया उपकरण ‘बी हाइव स्ट्रिप हैंगर कम स्पेसर’ विकसित किया है। इसे केंद्र सरकार के पेटेंट कार्यालय की ओर से पेटेंट प्रदान किया गया है। यह उपकरण मधुमक्खी पालन में खतरनाक परजीवी वरोआ माइट की रोकथाम और शहद में रसायनों के अवशेषों से मुक्ति दिलाने में सहायक सिद्ध होने का दावा किया जा रहा है।।
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कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने बताया कि यह उपकरण विश्व भर में मधुमक्खियों के सबसे खतरनाक दुश्मन-एक्टोपारासाइट्स माइट वरोआ डिस्ट्रक्टर के प्रबंधन के लिए सबसे सस्ता, प्रभावी और सुरक्षित उपकरण है। हानिकारक रासायनों से मुक्त शहद, पराग, प्रो पोलिस आदि जैसी अन्य छत्ते उत्पाद मनुष्यों को मिल सकेंगे। एक कॉलोनी में मेडिकेटेड स्ट्रिप लगाने में केवल 15 सेकंड लगते हैं और हर बार मधुमक्खी बक्सा खोलते हुए फ्रेमों को निश्चित दूरी पर रखने की समस्या का भी हल हो जाता है।

ये होंगी उपकरण की विशेषताएं
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल के पूर्व निदेशक प्रो. ओपी चौधरी ने यह उपकरण तैयार किया है। चौधरी का कहना है कि उपकरण जो मधुमक्खी पालन में वरोआ माइट की रोकथाम और शहद में रासायनों के अवशेषों से मुक्ति में मदद करता है। यह फूड ग्रेड प्लास्टिक से बना है और इसमें 15 मिलीमीटर की दूरी पर रासायनिक स्ट्रिप लटकाने का प्लेटफार्म है। इस उपकरण में दो टॉप स्पोर्ट्स मधुमक्खी फ्रेम के टॉप बार पर टिके होते हैं जिससे स्ट्रिप मोम के छत्ते से संपर्क किए बिना दो फ्रेमों के बीच लटकती है। इससे कीटनाशक का समान वितरण होता है जबकि यह शहद और अन्य उत्पादों को सुरक्षित रखता है।
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