हिसार। प्रदेश के अति पिछड़े जिले नूंह में पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी) ने दो साल की परियोजना शुरू की है। इसके तहत सर्वाधिक दूध देने वाली मुर्राह नस्ल की भैंस के जर्म प्लाज्मा से तैयार झोटे का सीमन पशुपालकों को निशुल्क दिया जा रहा है। इस सीमन से पैदा होने वाली भैंस की अगली पीढ़ी भी दुधारू होगी, जिससे पशुपालकों को फायदा मिलेगा।
नूंह जिले में पशुओं की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद दूध उत्पादन काफी कम है। प्रति व्यक्ति आय भी प्रदेश के अन्य जनपदों से कम है। यह जिला प्रदेश व देश में आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों की सूची में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस जिले में आर्थिक व सामाजिक उन्नति के लिए योजनाएं चलाने का निर्देश दे रखा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सीआईआरबी ने दो वर्षीय परियोजना शुरू की है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सज्जन सिंह बताते हैं कि इस परियोजना के तहत पशुपालकों को जर्म प्लाज्मा से तैयार मुर्राह नस्ल के उन्नत झोटे का सीमन निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। बीते सितंबर तक 1736 भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जा चुका था। अगले एक साल में अधिकाधिक भैंसों का गर्भाधान कराने का लक्ष्य है। सीआईआरबी निदेशक डॉ. टीके दत्ता ने कहा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नूंह जिले के पशुपालकों को मुर्राह का सीमन निशुल्क देने के साथ-साथ पशुपालन के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
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दुध उत्पादन से आय भी बढ़ेगी
मुर्राह नस्ल की अत्यधिक दूध देने वाली भैंस के झोटे से जर्म प्लाज्मा तकनीक के जरिए नए झोटे तैयार किए जाते हैं। इन झोटों के परिपक्व होने पर इनका सीमन एकत्रित कर उससे भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है। इस प्रकार से तैयार अगली पीढ़ी भी अत्यधिक दुधारू होती है। सीआईआरबी में इसके सफल प्रयोग के बाद अब नूंह जिले में पशुपालकों को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे कि अगले कुछ वर्षों में अत्यधिक दूध देने वाली भैंस तैयार होंगी। दूध उत्पादन बढ़ने से पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी।