हिसार रेंज के विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए पुलिस व शिक्षा विभाग की ओर से यातायात जागरूकता परीक्षा आयोजित की गई।
सरकारी, गैर सरकारी व अन्य शिक्षण संस्थानों में हुई इस परीक्षा में 6 हजार 683 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। खुद आईजी अनिल कुमार राव ने विभिन्न स्कूलों में जाकर परीक्षा का जायजा लिया।
स्कूल व कॉलेज स्तर पर ज्यादा अंक पाने वाले प्रतिभागियों की तीन सदस्यीय टीम का चयन किया जाएगा। यह टीम ब्लॉक व जिला स्तर पर स्कूल-कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करेगी।
इस तरह मिलेगा पुरस्कार
जिला स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाली टीम को संबंधति एसपी की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
जिला स्तर पर प्रत्येक वर्ग में प्रथम स्थान पाने वाली टीम मंडल स्तर पर होने वाली प्रश्नोत्तरी परीक्षा में भाग लेगी और मंडल स्तर पर प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाली टीम को पुलिस महानिरीक्षक द्वारा ईनाम देकर सम्मानित किया जाएगा।
मंडल स्तर पर प्रत्येक वर्ग में प्रथम स्थान पाने वाली टीम को राज्य स्तर पर होने वाली प्रश्नोत्तरी के लिए चुना जाएगा।
तीसरी बार हुई परीक्षा
हरियाणा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत यह परीक्षा तीसरी बार करवाई गई है।
इस बार हिसार में 964, सिरसा में 963, फतेहाबाद में 920, भिवानी में 1675 और जींद में 1011 बच्चों के अलावा सरकारी व गैर सरकारी स्कूल/कॉलेजों में करीब 1150 विद्यार्थियों सहित 6683 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
पुलिस के मुताबिक इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के माध्यम से सड़क सुरक्षा बारे जागरूकता लाकर इन दुर्घटनाओं को रोकना है।
इस मौके पर रेंज संयोजक डॉ. अजय कुमार, डीएसपी भगवान दास, परमजीत समौता, आरएसओ सदस्य, ट्रैफिक एसएचओ सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित थे।
बताने वाले ही तोड़ रहे कानून
एक तरफ पुलिस बच्चों से लेकर बड़ों तक को कानून का पाठ पढ़ा रही है, वहीं खुद पुलिसकर्मी लगातार यातायात नियमों की अनदेखी करते जा रहे हैं।
एक ओर परीक्षा चल रही थी, वहीं दूसरी ओर खुद पुलिसकर्मी बिना हेलमेट लगाए सारा दिन शहरों में घूमते दिखे। वहीं ट्रैफिक में ड्यूटी दे रहे कर्मचारी भी अपना समझकर बिना हेलमेट पुलिसकर्मियों को टोकना तक मुनासिब नहीं समझते।
ठंड में जमीन पर बैठकर दी परीक्षा
सुबह धुंध और ठंड होने के बावजूद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों को जमीन पर ही बैठकर परीक्षा देनी पड़ी। परीक्षा को लेकर सरकारी स्कूलों में कोई विशेष प्रबंध नहीं किए गए।
परीक्षा लायक माहौल नहीं बनाया गया। बच्चों को ऐसे कमरों में बैठकर परीक्षा देनी पड़ी, जहां एक तरफ कबाड़ पड़ा था, वहीं दूसरी तरफ मिट्टी से सने बैंच पड़े मिले।
जिन्हें क, ख, ग आता नहीं, उन्हें दे दिया प्रश्नपत्र
सरकारी स्कूल के प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को भी परीक्षा में बैठा दिया गया। इनमें से अधिकांश बच्चे तो ऐसे थे, जिन्हें ढंग से क, ख, ग भी नहीं बोलना आता है।
उन्हें यातायात परीक्षा का प्रश्न-पत्र थमा दिया गया। जब इस बारे में इन विद्यार्थियों के शिक्षकों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कल तो इनको किताब दी गई है, ऐसे में यह परीक्षा इनके लिए मायनों भरी नहीं है।
हर स्कूली स्तर पर ही विद्यार्थियों को यातायात के नियमों के प्रति जागरूक कर दिया जाएगा, तो निश्चित तौर पर वो भविष्य में जागरूक वाहन चालक बनेंगे। उनकी यही जागरूकता दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक होगी। पुलिस का राज्य स्तर पर एक प्रयास चल रहा है। इसमें जनता के सहयोग से सफलता हासिल करनी है।
आईपीएस अनिल राव, आईजी, हिसार रेंज