हिसार। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीरवार को एचएयू में शुरू हुए कृषि मेले में जल संरक्षण का संदेश देते कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के शोधित पानी का इस्तेमाल सिंचाई में किया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धान या गेहूं की जगह कम पानी में होने वाली तिलहन व दलहन की फसलें उगाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना होगा जिनसे कम पानी और कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। एसटीपी के शोधित पानी का इस्तेमाल सिंचाई में किए जाने के लिए 27 योजनाएं तैयार की थीं जिनमें से 20 पूरी हो चुकी हैं।
इनसे सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत मिलेगा, नहरों पर दबाव कम होगा और भूजल का दोहन भी घटेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ज्यादा पानी में होने वाली फसलों को छोड़ने और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना चलाई हुई है। इसके तहत वैकल्पिक फसलें लेने या खेत खाली छोड़ने वाले किसानों को आठ हजार रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता दी जाती है।