हिसार। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में कलाकारों और कारीगरों को इन-रेजिडेंस के रूप में नियुक्त करने के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करना और विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ऐसे कलाकारों व कारीगरों की सूची बनाकर उन्हें विवि में आमंत्रित करने पर विचार कर रहा है। इससे विद्यार्थियों को पारंपरिक कलाकारों को शिक्षा प्रणाली से जोड़कर कला के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों को भी काफी कुछ सीखने को मिलेगा। विवि प्रशासन के अनुसार उन्हें यूजीसी की तरफ से पत्र प्राप्त हुआ है।
उच्च शिक्षण संस्थानों में आमंत्रित किए जाने वाले कलाकारों व कारीगरों को कम से कम 5 से 20 वर्षों का अनुभव होना चाहिए। उन्हें ही संस्थान में मौका मिलेगा। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। यूजीसी के नए दिशानिर्देश न केवल छात्रों को लाभान्वित करेंगे, बल्कि कला और उद्योग क्षेत्र में भी नवाचार और विशेषज्ञता को प्रोत्साहित करेंगे।
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस : उद्योग विशेषज्ञों को मिलेगा शिक्षण का अवसर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत, यूजीसी ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की अवधारणा को भी लागू किया है। इसके माध्यम से उद्योग विशेषज्ञों को शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षण और मार्गदर्शन का अवसर मिलेगा।
पहल का उद्देश्य
-उद्योग और शिक्षा के बीच की खाई को पाटना।
-छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव प्रदान करना।
-नवाचार और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना।
-
यूजीसी की पहल से विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा। विवि इस पर काम कर रही है।
- प्रो. संजीव कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज, जीजेयू