पवन प्रेम सारस्वत
सिवानी मंडी। खंड के गांव रूपाणा में 2004 में पशुपालन विभाग ने अस्पताल तो बना दिया लेकिन यहां चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ की नियुक्ति करना भूल गया। लाखों रुपयों की लागत से बना राजकीय पशु अस्पताल चिकित्सक के इंतजार में खुद जर्जर हो गया है। यह परिसर कूड़ादान बन कर रह गया है। विभाग ने कभी पशु अस्पताल को नहीं संभाला।
पशुपालकों को उपचार के लिए अपने पशु या तो पड़ोसी गांव खेड़ा या सिवानी जाना पड़ता है। ग्रामीण कई बार अधिकारियों और राजनेताओं से यहां पशु चिकित्सक की नियुक्ति करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक यह मांग पूरी नहीं हो पाई है। 18 साल पहले ग्रामीणों की मांग पर पशुपालन विभाग ने रूपाणा गांव में पशु अस्पताल बनाया था। भवन तो बनकर तैयार हो गया लेकिन इसमें चिकित्सक अभी तक नियुक्त नहीं किए गए। विभाग का कोई अधिकारी भी भवन का हाल जानने तक नहीं आया। देखरेख के अभाव में अस्पताल का भवन खंडहर बन चुका है। चहारदीवारी और भवन की दीवारों पर दरारें आ चुकी हैं।
ग्रामीण मास्टर ईश्वर सिंह, सुरेंद्र एडवोकेट, रमेश वर्मा, मुकेश, मनोज, विनोद कुमार, सतपाल, हरिसिंह, राजेंद्र वर्मा, पूर्व सरपंच मानसिंह, जगदीश ने बताया कि गांव में करीब 3 हजार पशु हैं। पशुओं के बीमार होने पर पशुपालक नजदीकी गांव खेड़ा के डॉक्टर का सहारा लेने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार अभी रूपाणा गांव खेड़ा के डॉक्टर के कार्यक्षेत्र में आता है। वहां के डॉक्टर का भी यही कहना है कि दोनों गांवों को संभाल पाने में दिक्कत तो होती ही है। ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ की नियुक्ति की मांग को लेकर गांव वालों की तरफ से हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा ।
गांव के सरपंच प्रतिनिधि पवन कुमार, सोनू नोखवाल, मोनू वर्मा, पवन कुमार ने बताया कि इस बारे में उन्होंने कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल को मांग पत्र के जरिये इस समस्या के समाधान के लिए आवेदन किया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस समस्या को दूर करवा दिया जाएगा। संवाद