हिसार। राष्ट्रीय कवि संगम की हिसार इकाई की ओर से जिला पुस्तकालय के सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, नारी शक्ति, योग और जीवन मूल्यों पर विचार व्यक्त किए। युवा कवि रिया नागपाल ने इस शहर के शोर में अपनों की आवाज सुनाई नहीं देती, भीड़ तो बहुत है, कोई सूरत अपनी-सी दिखाई नहीं देती... रचना सुनाकर खूब सराहना बटोरी।
गोष्ठी में इकाई के संरक्षक तिलक जैन, मार्गदर्शक डॉ. चंद्रशेखर तथा मुख्य अतिथि वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष हरीश चंद्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन इकाई के अध्यक्ष नीरज कुमार मनचंदा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री पूनम मनचंदा ने मां वीणापाणि की वंदना से किया।
मुख्य अतिथि हरीश चंद्र ने कवियों से अपने लेखन के माध्यम से समाज को दिशा देने और जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कवि डॉ. राजेश सरदाना जीवंत ने आओ प्रतिदिन करें योग उपयोग हम, आओ मिलकर करें योग सब लोग हम... रचना सुनाकर योग का संदेश दिया। साहिल कौशिक एसकेवाई ने नारी शक्ति पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि शायर रविंदर कौशिक रवि ने स्वाभिमान पर अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीता। नम्रता गोयल ने प्रेम की भावनाओं को शब्द दिए तो जगदीश श्योराण, मनोज मुद्गल और डॉ. दविना अमर ठकराल देविका ने भी अपनी रचनाओं से समां बांधा। इस अवसर पर पीपी शर्मा, राजकुमार सुखीजा, दीपक प्रताप, डॉ. चंद्रशेखर, पूनम मनचंदा और नीरज कुमार मनचंदा ने भी काव्य पाठ किया।