हिसार। रुढि़वादी सोच के कारण 20 साल पहले जहां ग्रामीण महिलाएं घर से बाहर तक नहीं निकल पाती थीं। उस समय सूरेवाला गांव की बेटी अमरजीत कौर ने बिठमड़ा-समैण-किनाला-कंडूल-किरोड़ी व सूरेवाला में सबसे पहले हिंदी में एमए, ट्रैक्टर-बाइक चलाना व कबड्डी खिलाड़ी बनकर बेटियों-महिलाओं के लिए मिसाल पेश की।
पिता चंद्रभान के आदर्शों पर चलते हुए अमरजीत कौर ने मायके से ही गरीब महिलाओं के उत्थान के लिए काम करना शुरू कर दिया। पहले उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए गांव सूरेवाला में ही सिलाई-कढ़ाई-बुनाई व ब्यूटी पार्लर का निशुल्क कोचिंग सेंटर शुरू किया। बाद में महिलाओं को रोजगार दिलाकर उनके लिए छोटी इकाइयां स्थापित करने में भी सबसे आगे रहीं। महज 19 साल की उम्र से महिला सशक्तिकरण की अलख जगाने वाली अमरजीत कौर में महिलाओं के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा 42 साल की में भी कायम है। अमरजीत करीब 400 महिलाओं को रोजगार दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। आसपास के 6 गांवों की महिलाओं के लिए अमरजीत आईकॉन
बन चुकी हैं। गांवों की बेटियों को एकजुट कर तैयार की कबड्डी की टीम
42 वर्षीय अमरजीत कौर ने बताया कि जब वह 19 साल की थी तब गांव सूरेवाला में खंड स्तर पर कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें भाग लेकर गांव की पहली महिला कबड्डी खिलाड़ी बनीं। बिठमड़ा-समैण-किनाला-कंडूल-किरोड़ी व सूरेवाला में डोर टू डोर जाकर 11 बेटियों की ऐसी कबड्डी टीम बनाई, जिसने जिला स्तर पर अपने-अपने गांव का नाम रोशन किया।
योग शिक्षक बनकर महिलाओं को बना रही निरोगी
अमरजीत कौर योग विषय में एमए पास है। इस कारण इन्हें योग टीचर भी कहा जाता है। करीब 21 अलग-अलग गांवों में निशुल्क योग शिविर लगा चुकी हैं। महिलाओं को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ-साथ उन्हें बीमारियों से भी बचाव के उपाय बतातीं हैं। अमरजीत कौर ने बताया कि 2009 में गांव किरोड़ी निवासी बलकार पूनियां के साथ उनकी शादी हुई तो सास लक्ष्मी देवी व पति का भी भरपूर सहयोग रहा। इनके सहयोग से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम भी चला रही हूं। महिलाओं को अधिकाधिक पेड़ लगाने के लिए जागरूक कर रहीं हूं।