गांव खेदड़ में अपनी बात रखते किसान।
बरवाला, हिसार। गांव खेदड़ के किसानों ने मीटिंग कर खेतों में पानी के समाधान को लेकर मीटिंग कर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। थर्मल पावर प्लांट के पानी के कारण खेदड़ गांव की सैंकड़ों एकड़ जमीन खराब हो गई है, जिसने स्थानीय किसानों की आजीविका खतरे में आ गई है। यह स्थिति क्षेत्र की पर्यावरणीय और कृषि संबंधी स्थिरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
किसान रामस्वरूप ने बताया की थर्मल प्लांट से निकलने वाला जल रासायनिक प्रदूषण और उच्च तापमान से प्रभावित होता है। यह पानी आसपास की भूमि में रिसकर या सीधे खेतों में पहुंचकर मिट्टी की उर्वरक शक्ति को नष्ट कर रहा है। इस प्रदूषित जल के कारण फसलें सूख रही हैं। जिस कारण भूमि अनुपयोगी होती जा रही है। किसानों को भारी आर्थिक और भावनात्मक नुकसान हो रहा है। गांव के सभी परिवारों की आजीविका पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है। इस समस्या के कारण वे अपने परिवारों का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो रहे हैं। थर्मल पावर प्लांट की वाटर टैंक के पानी की वजह से करीब 300 एकड़ जमीन जलमग्न रहती है। जिसके कारण किसान फसल नहीं उगा पा रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करें। जिन किसानों की भूमि और फसलें इस प्रदूषित पानी और वाटर टैंक के कारण फसल नष्ट हुई हैं, उन्हें तुरंत उचित मुआवजा और पुनर्वास प्रदान किया जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। इस मौके पर खेदड़ गांव में किसान रामस्वरूप, जोगिंद्र, धर्मवीर, सत्यवान, बिजेंद्र, राजेश, सुरेश, दलवीर, दीपक,नरेश, बलराज, ताराचंद, सोनू, चांदी, बलराज आदि शामिल रहे।