बास (हिसार)। बास नगर पालिका को रद्द कर फिर से पंचायत का दर्जा दिलाने के लिए ग्रामीणों का एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा धरना रंग लाया है। करीब साढ़े तीन साल बाद बास को फिर से पंचायत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। नगरपालिका बनने पर ग्रामीणों के विरोध के बाद नारनौंद से विधायक रामकुमार गौतम, महम से विधायक बलराज कुंडू ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया। इसके बाद हिसार उपायुक्त की तरफ से एक कमेटी का गठन किया गया। अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने बास को फिर से ग्राम पंचायत बनाने की अनुशंसा भेजी है।
उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग पंचकूला को पत्र लिखते हुए कहा कि इस मामले में नगर पालिका बास को पंचायत बनाने के लिए गठित कमेटी ने नगर पालिका को रद्द करते हुए ग्राम पंचायत का गठन करने की अनुशंसा की है। बता दें 18 सितंबर 2018 को बास गांव को नगर पालिका बनाने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। चारों पंचायतों को भंग करते हुए बास नगरपालिका में तब्दील कर दिया गया था। ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े नियमों पर रोक लगती दिखाई दी तो जनवरी 2020 से ही बास के ग्रामीण नगरपालिका के विरोध में एकजुट होने लगे। प्रदर्शन, मांग पत्र व ज्ञापन देने के बावजूद भी जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 28 फरवरी से बास अनाज मंडी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था।
पालिका को रद्द कराने के लिए तीन दिन चला सर्वे
बास नगरपालिका कि वार्ड बंदी होने के बाद गांव को 13 वार्डों में बांटा गया और नगर पालिका में करीब 12639 वोट हैं। इसके बाद 3 दिन तक चले ग्रामीणों के सर्वे में 4210 लोगों ने भाग लिया। इसमें से 3266 लोगों ने नगर पालिका को रद्द करवाने के लिए वोट किया और 895 लोगों ने नगर पालिका को बनाए रखने के लिए वोट किया था। 49 लोगों ने नोटा को वोट किया। ग्रामीणों के सर्वे के आधार पर कमेटी ने उपायुक्त को अपनी रिपोर्ट सौंपी और उसी रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग पंचकूला को पत्र लिखते हुए ग्राम पंचायत की बहाली की अनुशंसा की है।
उपायुक्त की तरफ से पत्र जारी करते हुए कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर नगर पालिका को फिर से ग्राम पंचायत बनाने की अनुशंसा की है। इसको लेकर अब शहरी स्थानीय निकाय विभाग पंचकूला के निदेशक को पत्र भेजा गया है।
- विकास यादव, एसडीएम, नारनौंद