हिसार। जेल के कैदियों को इंडिया विजन फाउंडेशन की तरफ से शुरू किए गए रोजगार परक प्रशिक्षण से काफी लाभ हुआ है। जेल से छूटकर आने के बाद ट्रेनिंग लेने वाले 90 लोगों ने खुद का रोजगार शुरू कर दिया है। अपराध की दुनिया को छोड़कर अब वे सामान्य जीवन जी रहे हैं। इन 90 में से दो लोग इंडिया विजन फाउंडेशन में अफसर बन गए हैं।
इंडिया विजन फाउंडेशन की निदेशक मोनिका धवन ने बताया कि संस्था वर्ष 2012 से जेल में बंद बंदियों के कल्याण के लिए काम कर रही है। वर्ष 2012 में गुरुग्राम जेल में बंद प्रमेश सिंह और गोविंद से मुलाकात हुई थी और उस दौरान दोनों फाउंडेशन से जुड़े थे। चार साल तक वे जेल के अंदर फाउंडेशन का काम संभालते रहे। बाहर आने के बाद अन्य बंदियों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। उनकी संस्था देश के आठ राज्यों की 37 जेलों में काम कर रही है। मोनिका ने कहा कि जेल में 70 प्रतिशत बंदी ट्रायल पर होते हैं। ऐसे लोगों को फाउंडेशन की तरफ से प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससेवे जेल से बाहर आने के बाद अपना खुद का काम शुरू कर रहे हैं। ऐसे 90 लोग है जो अपने पांवों पर खड़े हैं। हिसार की केंद्रीय कारागार एक की बात करें तो यहां पर 1932 बंदी है इनमे से 550 कैदी है बाकी ट्रायल पर हैं।
महिला कैदियों के बच्चों की भी करते हैं देखभाल
मोनिका ने बताया कि जहां पर महिला कैदी हैं वहां छह साल से ऊपर के बच्चों की देखभाल भी की जाती है। जब तक बच्चे आत्मनिर्भर नहीं होते, उन पर नजर रखते हैं। करीब 150 ऐसे युवा हैं जो अब नौकरी कर रहे हैं। इसके अलावा करीब दो हजार किशोरों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि उनका भविष्य खराब न हो।