हिसार। सेक्टर 27-28 में गुप्ता औद्योगिक गैस प्राइवेट लिमिटेड में ऑक्सीजन सिलिंडर को भरने के बाद उसकी जांच करते समय सिलिंडर फटने से विजेंद्र (38) की मौत के मामले में ग्रामीण दूसरे दिन दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई। पांच गांवों के ग्रामीणों, किसान नेताओं, सामाजिक संगठनों के बीच वीरवार को वार्ता हुई। अनाज मंडी में गठित कमेटी, गुप्ता गैस एजेंसी के संचालक और अन्य के साथ बैठक हुई। बैठक के दौरान मृतक के परिवार को आर्थिक मदद, बीमा और मृतक की पत्नी की पेंशन आदि मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजन शव उठाने पर सहमत हो गए। देर शाम गांव में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
नियाणा गांव निवासी मृतक विजेंद्र के परिजन और नियाणा, खोखा, खरड़, अलीपुर, मिर्जापुर के काफी ग्रामीण वीरवार को सिविल अस्पताल परिसर में पहुंचे। ग्रामीणों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया। ग्रामीणों ने कहा कि विजेंद्र के परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसके जाने के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। जब तक कंपनी के संचालक की गिरफ्तारी नहीं होगी तब तक शव नहीं लेंगे। संचालक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। अब तक कंपनी संचालक एक बार मृतक के परिवार से बात करने तक नहीं आया। परिजनों ने जिला प्रशासन को शाम 5 बजे तक का अल्टीमेटम दिया। सदर थाना पुलिस की ओर से कार्रवाई न किए जाने पर ग्रामीणों ने सदर थाना के बाहर जाकर विरोध भी जताया। इसके बाद वहां से अस्पताल लौट आए और देर शाम को उनका समझौता हो गया।
बता दें कि नियाणा गांव के निवासी विजेंद्र की मंगलवार दोपहर बाद करीब 2 बजे ऑक्सीजन प्लांट में सिलिंडर फटने से मौत हो गई थी। मृतक के भाई राजेश ने पुलिस को बयान देकर आरोप लगाया कि उसके भाई को जबरदस्ती ऑक्सीजन सिलिंडर की टेस्टिंग का काम दिया गया। जिसमें उसके भाई की मौत हो गई।