हिसार। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश खत्री सौरभ की अदालत ने किसानों से 25% कमीशन मांगने के आरोप में कृषि विकास अधिकारी बलविंद्र को दोषी करार देते हुए 5 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक धन और किसान हितों से जुड़ी भ्रष्ट गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
वर्ष 2020 में गांव बाड्या रांगड़ान के किसानों रोहताश और सुरेंद्र ने विजिलेंस को शिकायत दी। शिकायकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने फसल बीमा के लिए आवेदन किया था। कृषि विकास अधिकारी बलविंद्र ने नुकसान की रिपोर्ट लगाने के बदले मुआवजे का 25% कमीशन मांगा। किसानों ने ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी, जिसमें आरोपी खुद ‘25 फीसदी’ की रकम तय करने और पैसे न देने पर ‘जीरो लॉस’ रिपोर्ट भेजने की बात कहता हुआ सुनाई दिया।
अदालत में अभियोग की सुनवाई के दौरान दोनों मुख्य गवाह मुकर गए, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट ने रिकॉर्डिंग को असली बताया गया। साथ ही कॉल डिटेल ने भी पुष्टि की। किसानों और आरोपी के बीच 20 अगस्त 2020 को बातचीत हुई थी। अदालत ने माना कि आरोपी ने तय रकम न देने वाले किसानों की रिपोर्ट ‘नो लॉस’ भेजी, जबकि अन्य सह-खातेदारों को मुआवजा मिल गया।
अदालत ने कहा, भ्रष्टाचार समाज के लिए गंभीर खतरा
सजा पर सुनवाई के दौरान दोषी बलविंद्र ने पारिवारिक हालात और बीमारी का हवाला देकर नरमी की मांग की। अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि “भ्रष्टाचार समाज के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे मामलों में नरमी न्याय व्यवस्था को कमजोर करती है।” अदालत ने दोषी को तुरंत न्यायिक हिरासत में भेजने और जुर्माना न भरने पर एक साल अतिरिक्त सजा का आदेश दिया।