सबसे पहले आदर्श गांव का तमगा हासिल करने वाला बालसमंद पेयजल के लिए तरस रहा है। गांव के लोग राजस्थान से पानी लाकर प्यास बुझाते हैं। आधुनिक अधिकतर सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद पेयजल न होना गांव की सभी खूबियों को पीछे छोड़ देता है।
आदमपुर हलके का सबसे बड़ा गांव माने जाने वाला राजस्थान बार्डर पर हरियाणा का आखिरी गांव बालसमंद 400 साल से ज्यादा पुराना है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि गांव का नाम गांव के चारों और बालू के टिब्बे होने के कारण जिसे बालू का समंदर कहते थे। जिसके कारण गांव का नाम बालसमंद पड़ा। कुछ बुजुर्गों का कहना है कि गांव का नाम बालाजी से संबंधित होने के कारण बालसमंद पड़ा। गांव में बालाजी का प्राचीन मंदिर जो सालासर मंदिर से भी पुराना है। गांव के बुजुर्गों का यह भी मानना है कि सालासर के मंदिर में जोत बालसमंद मंदिर से गई हुई थी।
हिसार के एरिया का सबसे बड़ा गांव
भलेराम तहसीलदार, शेर सिंह जांगड़ा ,राजेश भागीरथ, भीम सिंह, पवन कुमार, सुभाष श्योराण, लियाकत अली, नरसिंह बलहारा, नरसी ने बताया कि गांव की आबादी लगभग 25000 के आसपास है। हिसार के इस एरिया का यह सबसे बड़ा गांव है। गांव में शहर की तरह सुविधाएं हैं। गांव में करीब 10000 वोट हैं। गांव में 17500 एकड़ के करीब जमीन है। गांव में लड़के-लड़कियों के लिए अलग राजकीय उच्च विद्यालय हैं। जो 1966- 67 के करीब बने थे। चार प्राइमरी स्कूल हैं। एक सरकारी आईटीआई तथा एक प्राइवेट आईटीआई भी है।
अंग्रेजों के जमाने की पुलिस चौकी
गांव में पुलिस चौकी अंग्रेजों के शासन काल से है। दो बस स्टेंड बने हुए हैं। पिछली सरकार में गांव को उप तहसील का दर्जा दिया गया था। खेल स्टेडियम भी बनाया गया है। गांव में बहुत पुरानी अनाज मंडी है। यह प्रसिद्ध मंडी होती थी जिसे गुड़ मंडी के नाम से जानी जाती था। गांव में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दो जलघर हैं। प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र ,पशु चिकित्सा केेद्र,16 आंगनबाड़ी केन्द्र भी मौजूद हैं। गांव में करीब 40 धार्मिक मंदिर हैं। 200 साल पुराना प्राचीन शिव मंदिर अपना महत्व रखता है। हनुमान मंदिर, जीण माता मंदिर, आर्य समाज मंदिर के अलावा दो मस्जिद हैं।
हरियाणा का पहला आदर्श गांव बना था बालसमंद
हरियाणा का सबसे पहला आदर्श गांव का दर्जा बालसमंद को मिला था। प्रदेश में सबसे पहले घर-घर पानी का कनेक्शन दिया गया था। गांव में गोशाला को ग्रामीणों के सहयोग से चलाया जाता है। गोशाला संचालन पूर्व तहसीलदार भले राम कर रहे हैं।
सभी समाज की चौपाल....
गांव की सरपंच मंजू देवी ने बताया कि गांव में जांगड़ा चौपाल, ब्राह्मण चौपाल, जाट चौपाल, वाल्मीकि चौपाल, खटीक चौपाल, गोयल चौपाल आदि लगभग सभी बिरादरी की चौपाल है। गांव में पंचायत घर भी है। गांव में अनेक तालाब भी हैं। जो विभिन्न नामों से प्रसिद्ध हैं।
सरकारी सेवाओं में भी आगे
ब्रिगेडिर नरेंद्र लौरा, कर्नल दीवान सिंह, डिप्टी सीएमओ दयानंद लौरा बीडीएस जय सिंह लोहचब सहित गांव के लोग आर्मी, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा सेवा, नेवी, एअर फोर्स, आबकारी कराधान सहित अन्य विभागों में तैनात है। सेना में ब्रिगेडियर, सीएमओ, कर्नल, हेडमास्टर, प्रिंसिपल सहित अन्य पदों पर सेवा दे रहे हैं। करीब एक हजार लोग सरकारी नौकरी में हैं।
राजनीति में भी अहम भूमिका..
राजनीतिक नजरिए से आदमपुर हलके का केंद्र बिंदु माना जाता है। इस गांव का जिस प्रत्याशी की ओर झुकाव हो उस प्रत्याशी का विधानसभा में जाना तय हो जाता है। गांव के युवा नेता गांव में बीडीसी चेयरमैन हंसराज बैनीवाल बने हैं। गांव के निवासी भाजपा के युवा नेता अरूणदत्त शर्मा जिला पार्षद बने हैं। गांव के निवासी कुरडाराम नंबरदार ने हविपा से आदमपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा था।
समस्या ....
गांव में पेयजल सबसे बड़ी समस्या है। भूजल खारा होने के कारण यहां के लोग राजस्थान से पानी लाकर पीते हैं। भूजल खारा होने के कारण उसका प्रयोग भी नहीं कर पाते। खेती के लिए नहरी पानी भी नहीं है। गांव में बिजली के लंबे कट की समस्या है। सीवरेज की लाइन होने के बावजूद भी सफाई न होने के कारण शुरू नहीं है। बस स्टैंड व कॉलेज की गांव वालों की मुख्य मांग है।
यह रहे सरपंच
जय लाल लौरा, राम स्वरूप कासनिया, रामजीलाल आयऱ, रणजीत सिंह चेयरमैन, इंद्र सिंह आर्य, धर्म सिंह, मीनाक्षी शर्मा, राधा देवी, सुमित्रा देवी, कन्हैया लाल फौजी, सुभाष खटीक, जगदीश लौरा गांव के सरपंच रह चुके हैं। वर्तमान में मंजू देवी हैं।
नाम चमकाने वाले खिलाड़ी
एशियन खिलाड़ी छोटो लौरा ने एशियन गेम में बाक्सिंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। भगत सिंह बॉक्सर, बॉक्सिंग में ही मदन पूनिया राज्य स्तरीय खिलाड़ी, सोनू तथा जगदीप सरोहा भी बाक्सिंग के नेशनल खिलाड़ी हैं।