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इन्हांसमेंट के 89 करोड़ पर फंसा पेंच

Thu, 14 Jan 2016 01:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/हिसार
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सेक्टर 15 ए के इन्हांसमेंट मामले में लैंड ओनर को मिले 89 करोड़ रुपये वापस जमा करवाने के मामले पर बड़ा संशय खड़ा हो गया है। लैंड ओनर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में डिले कंडोन की एप्लीकेशन लगाई गई है। एप्लीकेशन लगाने में देरी के बाद लैंड ओनर व सेक्टरवासियों की एकबारगी धड़कनें तेज हो गईं हैं। पूरा मामला अब न्यायपालिका पर निर्भर है, जिसका फैसला 1 फरवरी को होना है।
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अगर सुप्रीम कोर्ट डिले कंडोन की एप्लीकेशन स्वीकार करती है तो लैंड ओनर स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) लगा सकेगा। अगर कोर्ट इसे रिजेक्ट करती है तो हर हाल में लैंड ओनर को 89 करोड़ रुपये ब्याज सहित तुरंत प्रभाव से जमा करवाने होंगे।

एसएलपी लगी तो फिर अटक जाएगा मामला
उधर सेक्टरवासियों की सुप्रीम कोर्ट में एप्लीकेेशन लगने से नींद उड़ गई है। लोअर कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक केस ले जाने व अपने हक में फैसला पाने के लिए उन्होंने 36 साल मेहनत की है। एसएलपी से डरे सेक्टरवासी पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केविट लगा चुके थे कि सामने वाली पार्टी अगर इस मामले में कोई पिटीशन फाइल करे तो उन्हें भी इसकी सूचना दी जाए।
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सेक्टरवासियों का नफा नुकसान
- डिले कंडोन की एप्लीकेशन कोर्ट स्वीकार करती है तो इंन्हासमेंट की लड़ाई दोबारा शुरू हो जाएगी।
- हालांकि यह कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्धारित होगा। इसमें सेक्टरवासियों को भी इन्हांसमेंट देने का फैसला भी आ सकता है और नहीं भी।
- अगर एप्लीकेशन रिजेक्ट होती है तो सेक्टरवासियों की बल्ले बल्ले हो जाएगी। 1002 मकान मालिकों को इन्हांसमेंट राशि नहीं भरनी पड़ेगी। उल्टा रेजीडेंट द्वारा जमा करवाई गई अधिक राशि उन्हें वापस मिलेगी।

लैंड ओनर को नफा नुकसान
- डिले कंडोन की एप्लीकेशन स्वीकार होती है तो लैंड ओनर को एक और मौका मिलेगा।
- उसे हुडा के लैंड एक्वीजेशन डिपार्टमेंट से यह राशि मिल सकती है।
- अगर एप्लीकेशन रिजेक्ट हुई तो इन्हांसमेंट के रूप में मिली उसे करीब 89 करोड़ रुपये की राशि ब्याज सहित वापस जमा करवानी होगी।

यूं समझे डिले कंडोन को
किसी भी मामले में अथवा कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने के लिए संबंधित पार्टी के पास 90 दिन का समय होता है। इसमें कोर्ट फैसले की सर्टीफाइड कॉपी निकलने वाली डेट को गिना जाता है। निर्धारित समय में देरी होने के बाद कोर्ट से अनुमति मांगना डिले कंडोन एप्लीकेशन होती है।

यह था मामला
27 अगस्त 2015 को हाई कोर्ट ने 36 साल पुराने सेक्टर 15 के इन्हांसमेंट मामले में रेजीडेंट के हक में फैसला सुनाया था। इस फैसले के बाद 1002 रेजीडेंट पर पड़ने वाली करीब 350 करोड़ रुपये की इन्हांसमेंट एक बार टल गई। कोर्ट ने फैसले में कहा था कि हुडा द्वारा रेजीडेंट पर डाली गई इन्हांसमेंट गलत है। कोर्ट ने 30 साल पहले सेक्टरवासियों पर डाली गई 11.23 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से डाली गई इन्हांसमेंट को सही ठहराया था। रेजीडेंट ने दावा किया था कि उन पर 375 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से गलत इन्हांसमेंट डाली गई है। उधर इस बीच निचली अदालत ने एक फैसला लैंड ओनर के हक में भी कर दिया था। लैंड ओनर को हुडा एक्वीजेशन डिपार्टमेंट से कोर्ट के माध्यम से करीब 89 करोड़ रुपये की पेमेंट मिल गई। हालांकि इस पेमेंट के बदले लैंड ओनर से इतनी राशि की कीमत की सिक्योरिटी ली गई। और यह शर्त भी रखी कि उच्च अदालत में अगर कोई इन्हांसमेंट राशि में फेरबदल का फैसला आता है तो लैंड ओनर को यह राशि ब्याज सहित वापस जमा करवानी होगी।

वर्जन
लैंड ओनर ने डिले कंडोन की एप्लीकेशन हाई कोर्ट में लगा दी है। उसकी 1 फरवरी तारीख दी है। इस तारीख पर ही निर्भर करेगा कि कोर्ट इसे स्वीकार करती है या रिजेक्ट।
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- राममेहर सिंह मलिक, प्रधान सेक्टर 15 ए

एप्लीकेशन लगी है मगर अभी एसएलपी नहीं डल पाई है। यह कोर्ट पर निर्भर है। देखते हैं आखिर क्या होता है।
- लक्ष्मी नारायण खटाणा, लैंड ओनर
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