अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हिसार की बेटी किरण गोदारा ने आस्ट्रेलिया में दूध-दही का दम दिखाते हुए तिरंगा लहराया है। किरण गोदारा ने गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ खेलों में मॉरीशस देश की खिलाड़ी के साथ हुए मुकाबले में कांस्य पदक जीता है। यह मेडल जीतने के बाद किरण गोदारा कॉमनवेल्थ खेलों में 76 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य जीतने वाली भारत की पहली महिला रेसलर बन गई हैं। किरण की जीत की खुशी में परिजनों ने मिठाई बांटकर जमकर खुशियां मनाई। 14 साल पहले 2004 में किरण के ने नाना रामस्वरूप ने उसे अपने घर में बने अखाड़े में उतारा था।
पहले ही राउंड में किया चित
किरण गोदारा का कांस्य मेडल के लिए मॉरीशस की पहलवान कातुओस्किया परिधावेन के साथ वीरवार को मैच हुआ। यह मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे लाइव प्रसारित किया गया। इसी समय किरण गोदारा के पिता कुुलदीप गोदारा, माता गीता देवी, छोटा भाई अजय गोदारा और कोच विष्णुदास भी मैच को लाइव देखते रहे। कांस्य मेडल के लिए मैच में तीन-तीन मिनट के दो स्तर होते हैं। किरण ने तीसरे मिनट में ही विरोधी पहलवान को चित करके परचम लहरा दिया। किरण ने 10-0 से विरोधी पहलवान को मात दी। जीत के बाद परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
2004 में नाना के घर के आंगन से की थी शुरुआत
अंतरराष्ट्रीय कुश्ती पहलवान किरण गोदारा के पिता कुलदीप गोदारा ने बताया कि किरण का बचपन गांव कालीरावण में अपने नाना के घर बीता है। किरण की प्राथमिक शिक्षा भी कालीरावण में ही हुई है। किरण के नाना रामस्वरूप खिचड़ किरण ने 2004 में अपने आंगन में ही कुश्ती की शुरुआत की थी। उनका सपना था कि किरण एक दिन देश का नाम रोशन करेगी। आज किरण ने अपने नाना का सपना पूूरा कर दिखाया है। अपनी बेटी की जीत की खुशी में किरण की मां गीता देवी के आंखों में खुुशी के आंसू छलक आए। गीता देवी ने बताया कि उनकी बेटी के मेडल जीतने का श्रेय उसके नाना को जाता है। अगर आज वे जिंदा होते तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता। 2009 में किरण के नाना का बीमारी के कारण निधन हो गया था।
महाबीर स्टेडियम में पहलवानों ने बांटे लड्डू
किरण की जीत की खुशी में महाबीर स्टेडियम में कुश्ती का अभ्यास करने वाले पहलवानों ने शाम पांच बजे लड्डू बांटकर खुशी मनाई। किरण गोदारा के कोच विष्णुदास ने बताया कि किरण कॉमनवेल्थ गेम्स के 76 किलोग्राम वर्ग में कांस्य मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला कुश्ती पहलवान बन गई हैं।