पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेंद्र वत्स ने कहा कि वे और उनकी टीम लगातार पशुओं का इलाज कर रही है। पशुओं के उपचार में कुछ तब्दीली की गई है और दवाइयों में बदलाव किया गया है। विभाग ने पंजाब से भी कुछ औषधियां मंगवाई हैं। इसके बाद पशुओं के उपचार की पद्धति में बदलाव किया जाएगा। दूसरी ओर पशुओं के सैंपल की एक और रिपोर्ट आना बाकी है। इस रिपोर्ट के बाद स्थिति थोड़ा साफ होने की उम्मीद है।
यह था मामला
गांव नंगथला में एक-एक करके 52 दुधारू पशुओं की मौत हो गई। शनिवार शाम से खाती-पीती भैंस अचानक डगमगा कर गिर रही थीं और गिरते ही मरने लगीं। लुवास के वैज्ञानिकों की टीम ने मंगलवार को पशुओं के ब्लड, सेल्स, चारे सहित कई जरूरी सैंपल लिए और पशुओं का इलाज शुरू किया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतड़ियों में जख्म मिले थे। क्लोस्टिडियम कीटाणु भी मिला, जो बेहद खतरनाक होता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ अन्य बैक्टीरिया भी हो सकते हैं, जिनके कारण इतनी खतरनाक स्थिति उत्पन्न हुई है। शुक्रवार सुबह तक इंतजार करना होगा। शुक्रवार को एक मुख्य रिपोर्ट आएगी, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।