बड़सी गेट के समीप एक दुकान पर छानबीन करते हुए टीम के सदस्य
हांसी। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता व राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की संयुक्त टीम ने फर्जी एनसीईआरटी की किताबों की शिकायत पर पांच किताब घरों पर छापा मारा। इस दौरान वहां पर रखी एनसीईआरटी की किताबों की जांच की। जांच के दौरान वहां सब ठीक मिला।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की इंचार्ज सुनैना के नेतृत्व में छापा मारा गया। उन्होंने बताया कि टीम को शिकायत मिली थी कि किताब घरों पर एनसीईआरटी की फर्जी किताबें बेची जा रही हैं। जिसके जरिए किताब घर संचालक घपला कर रहे हैं और छात्रों को नुकसान हो रहा है। इस पर उन्होंने एनसीईआरटी से किताबों की जांच के लिए सहयोग मांगा। जिस पर एनसीईआरटी के दिल्ली स्थित मुख्यालय से प्रकाशन विभाग से असिस्टेंट प्रोडक्शन ऑफिसर ओमप्रकाश व उनके सहायक श्रीकांत पहुंचे। पहले लाल सड़क के समीप एक किताब घर पर छापा मारा गया इसके बाद बड़सी गेट के पास स्थित चार किताब घरों पर जांच की। इस दौरान वहां पर रखी एनसीईआरटी की किताबों और गोदामों में भी जांच की। यहां पर एनसीईआरटी की कम, बल्कि निजी कंपनियों की किताबें ज्यादा मिलीं।
जांच के दौरान सभी किताब घरों पर स्थिति ठीक मिली। कहीं पर भी फर्जी किताबें नहीं मिली। हालांकि टीम की कार्रवाई की सूचना मिलने पर किताब घर संचालक सतर्क हो गए।
वाटर मार्क से होती है असली किताब की पहचान
एनसीईआरटी के हर दूसरे पन्ने पर एनसीईआरटी का वाटर मार्क नजर आ जाएगा। अगर बुक-मार्क मिसिंग है तो किताब फर्जी है। वहीं किताब की प्रिंट क्वालिटी निम्न स्तर की है, ग्राफिक्स या चित्र स्पष्ट नहीं हैं तो भी किताब फर्जी हो सकती है। वहीं फर्जी किताबों में अधूरा पाठ्यक्रम मिलता है। ऐसे में विद्यार्थियों को नुकसान होता है।
एनसीईआरटी की फर्जी किताबों के बेचे जाने की सूचना पर हमने पांच किताब घर पर जांच की। कहीं भी फर्जी किताबें नहीं मिली। वाटर मार्क के जरिए असली व नकली किताबों की पहचान कर सकते हैं।- ओमप्रकाश, सहायक उत्पादन अधिकारी, एनसीईआरटी