हांसी। हांसी जिला बने दस महीने से अधिक हो गए हैं लेकिन फायर ब्रिगेड की व्यवस्था बदहाल है। करीब तीन लाख की आबादी और 85 गांवों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे फायर स्टेशन पर आठ दमकल गाड़ियां हैं इनमें से पांच कंडम घोषित हो चुकी हैं। ऐसे में आग की घटनाओं से निपटने के लिए महज तीन गाड़ियां बची हैं। इनमें भी आधुनिक उपकरणों की कमी है।
कर्मचारियों के अनुसार आग की बड़ी घटना होने पर सीमित संसाधनों के कारण मुश्किलें बढ़ जाती हैं। विभाग को कुल 15 दमकल गाड़ियों और दो फायर ब्रिगेड स्टेशन कार्यालयों की जरूरत है। ऊंची इमारतों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म जैसे जरूरी उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। फायरमैन के पास आधुनिक फायर प्रोटेक्टिव सूट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भी कमी है। ऐसे में आग बुझाते समय कर्मचारियों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।
बदहाल इमारत और अनसुनी शिकायतें
फायर स्टेशन की इमारत भी कंडम घोषित की जा चुकी है और यह करीब दो फीट नीचे है। फायरमैन विनोद कुमार ने बताया कि विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र देकर समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी ओर से आग पर जल्द से जल्द काबू पाने का पूरा प्रयास करते हैं। हांसी फायर स्टेशन के आसपास करीब 85 गांवों तक आग बुझाने की जिम्मेदारी है। जिला मुख्यालय की बड़ी आबादी और शहर की संकरी गलियों में आग लगने पर दमकल कर्मचारियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
फायर स्टेशन पर आधुनिक यंत्रों और पर्याप्त संसाधनों की कमी है। कर्मचारी सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। प्रशासन को फायर ब्रिगेड के संसाधनों को दुरुस्त करना चाहिए।
- सुरेंद्र यादव, राज्य कैशियर, सर्व कर्मचारी संघ।
फायर ब्रिगेड की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। कर्मचारियों के पास पर्याप्त आधुनिक उपकरण नहीं हैं और कई दमकल गाड़ियां कंडम हो चुकी हैं। इसके बावजूद फायरमैन अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी निभा रहे हैं। कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात की जाएगी। इस दौरान फायर ब्रिगेड की व्यवस्था में सुधार, नई दमकल गाड़ियां और आधुनिक अग्निशमन उपकरण उपलब्ध कराने की मांग रखी जाएगी।
- अशोक यादव, कर्मचारी नेता।