हिसार। शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े 36 खंडों में स्थिति सुधारने के लिए आरोही मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना की गई थी। अटल से लेकर कंप्यूटर लैब व विद्यार्थियों को हॉस्टल सहित हाईटेक सुविधाओं से लैस करने के लिए प्रति वर्ष उपरोक्त सभी स्कूलों का बजट 100 करोड़ रुपये तय किया गया।
इतना ही नहीं, प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद अनुबंध आधार पर 2250 ट्रेंड शिक्षकों को इन स्कूलों में ज्वाइन करवाया था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता। वेतन न मिलने व पक्का न करने के कारण बीते 11 साल में 1965 शिक्षकों ने त्यागपत्र दे दिया। आलम यह है कि उपरोक्त 36 आरोही मॉडल स्कूलों में केवल 285 शिक्षक ही रह गए है, जिनके हाथों में 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य है। अब मार्च माह में परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है। ऐसे में देखना यह है कि आरोही स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को किन परिस्थितियों में शिक्षक पढ़ाएंगे।
2018 में शिक्षकों को करना था पक्का, लेकिन सरकार ने मोड़ा मुंह : शिक्षा निदेशालय ने आदेश दिए थे कि आरोही मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत सभी शिक्षकों व गैर-शिक्षकों को 5 साल बाद पक्का किया जाएगा, लेकिन 11 साल बीतने के बावजूद आज तक एक भी शिक्षक व गैर-शिक्षक पद पर तैनात कर्मचारी पक्का नहीं हो पाया, जिससे रोषित होकर एक के बाद एक शिक्षकों ने त्यागपत्र देना शुरू कर दिया। हालांकि 2019, 2023 में उपरोक्त शिक्षकों व कर्मचारियों के दस्तावेज वेरिफाई के लिए मंगवाएं गए, लेकिन आज तक कोई भी पक्का नहीं हो पाया।
अब तो आरोही विद्यालयों का स्तर इतना खराब हो चुका है कि साढ़े 4 माह से शिक्षकों व गैर-शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है।