हिसार। प्रदेश सरकार बेसहारा गोवंश के रखरखाव के लिए निजी व सरकारी गोशालाओं को 2.73 रुपये प्रति गाय के हिसाब दे रही है। वहीं नगर निगम गोअभयारण्य को संभालने वाली संस्था को 20 रुपये प्रति गाय के हिसाब से भुगतान कर रहा है। हालांकि एक गोवंश का एक दिन का खर्च 100 रुपये से ज्यादा है।
बता दें कि नगर निगम ने बेसहारा गोवंश के लिए बनाए गए गोअभयारण्य के रखरखाव का जिम्मा संस्था गो सेवा फाउंडेशन को दिया हुआ है। निगम की तरफ गोअभयारण्य में रखे गए गोवंश की देखभाल के लिए फाउंडेशन को 20 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। फिलहाल गोअभयारण्य में करीब 4200 गोवंश हैं, जिनमें गाय व नंदी दोनों शामिल हैं।
इस हिसाब से भुगतान कर रही है सरकार
नकारा प्रतिशत रुपये प्रति पशु प्रति वर्ष के हिसाब से
0 से 33 प्रतिशत -0 रुपये
33 से 50 प्रतिशत -100 रुपये
51 से 75 प्रतिशत- 200 रुपये
75 से 99 प्रतिशत- 300 रुपये
100 प्रतिशत -500 रुपये
इस वित्त वर्ष का नहीं आया बजट
निगम अधिकारियों की मानें तो गो सेवा आयोग की तरफ से उन्हें मौजूदा वित्त वर्ष का बजट नहीं मिला है। निगम अपने खर्च पर ही गोअभयारण्य चल रहा है। इसमें संस्था की तरफ से भी थोड़ी आर्थिक मदद मिल जाती है। उधर संस्था के कर्मचारियों की मानें तो निगम की तरफ से मिलने वाली राशि काफी ज्यादा है। असलियत में एक गोवंश पर एक दिन का खर्च 100 रुपये से ज्यादा है। उधर पशुपालन विभाग की मानें तो सरकार की तरफ से निजी व सरकारी गोशालाओं को साल में दो बार बजट दिया जाता है। अगर गोशाला को गोवंश के लिए कोई सुविधा जैसे शेड आदि उपलब्ध करवानी हो तो उन्हें एक अलग फंड से बजट उपलब्ध करवाया जाता है।
सरकार की तरफ से गोशालाओं को साल में दो बार बजट दिया जाता है। इस साल एक बार अप्रैल में बजट दिया जा चुका है। अब कुछ गोशालाओं की वजह से बजट जारी नहीं हो सका है। सरकार गोवंश की नाकारा प्रतिशतता के हिसाब से राशि निर्धारित की हुई है।
-डॉ. सुखविंद्र, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग