हिसार। नगर निगम प्रशासन की कचरे से बिजली और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) बनाने का प्लांट लगाने की योजना अब सिरे चढ़ने लगी है। प्रदेश सरकार और इंडियन ऑयल की ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बीच एमओयू साइन हो चुका है।
कंपनी प्लांट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रस्तावित बिजली प्लांट में 25 मेगावाट बिजली और सीबीजी प्लांट में 500 मीट्रिक टन सीबीजी तैयार की जाएगी।
सीबीजी का इस्तेमाल वाहनों में सीएनजी के विकल्प के तौर पर किया जा सकेगा। बीड़ बबरान-श्यामसुख रोड स्थित राजकीय पशुधन फार्म (जीएलएफ) की 55 एकड़ छह कनाल 16 मरले जमीन प्लांट के लिए तय की गई है। इसके बदले नगर निगम ने ढंढूर डंपिंग स्टेशन की 45 एकड़ जमीन जीएलएफ को दी है।
15 एकड़ में लगेगा सीबीजी प्लांट
ठोस कचरे के निस्तारण के लिए करीब 15 एकड़ जमीन में सीबीजी प्लांट लगाया जाएगा। इसमें गीले कचरे और गोबर को मिलाकर कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार होगी। प्लांट में हिसार के अलावा जींद, हांसी और फतेहाबाद से भी कचरा लाया जाएगा। जैविक कचरे और बायोमास को शुद्ध कर तैयार होने वाली सीबीजी स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत है, जिसके गुण सीएनजी के समान होते हैं। अधिकारियों के अनुसार बायोगैस से कार्बन डाईऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड और नमी जैसी अशुद्धियां हटाकर मीथेन की मात्रा 90 प्रतिशत से अधिक की जाएगी। इसके बाद शुद्ध गैस को उच्च दबाव पर कंप्रेस कर सिलेंडरों में भरा जाएगा और वाहनों में इस्तेमाल किया जाएगा।
निगम बनने के 10 साल बाद सिरे चढ़ा प्रोजेक्ट
हिसार को वर्ष 2016 में नगर निगम का दर्जा मिला था। इसके बाद से ही नगर निगम प्रशासन कचरे से बिजली और गैस बनाने के प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने में जुटा था। अब करीब 10 साल बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
कचरे से बिजली और कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (सीबीजी) लगाने के लिए ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बीच एमओयू साइन हो चुका है। कंपनी इसकी डीपीआर तैयार करेगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी। प्लांट में 25 मेगावाट बिजली और 500 मीट्रिक टन सीबीजी बनाई जाएगी।
- सी जयाश्रद्धा, आयुक्त, नगर निगम हिसार।