कुलदीप जांगड़ा
हिसार। जिले के कोविड-19 घोषित अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में म्यूकरमाइकोसिस वार्ड में दाखिल ब्लैक फंगस के 20 प्रतिशत मरीजों ने न तो कोरोना टेस्ट करवाया है और न ही पहले कोरोना का इलाज लिया है। फिर भी ये मरीज ब्लैक फंगस संक्रमण के शिकार हुए हैं।
इसे लेकर चिकित्सक भी हैरान हैं, क्योंकि इन में फंगस फैलने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। बाकी 80 प्रतिशत मरीज शुगर से ग्रस्त और कोविड-19 होने या जिन्होंने कोरोना इलाज में स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया है। साथ ही ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी रहे हैं। इस लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से ब्लैक फंगस संक्रमित हुए हैं। इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि इन मरीजों में क्या कारण और दिक्कत रही, जिससे फंगस फैली है। इसका पता लगाना भी मुश्किल है, क्योंकि इस समय मरीजों की संख्या बढ़ गई है और उनको इलाज देने पर ही पूरा फोकस है। इस पर समय रहते स्टडी किए जाने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज में 85 मरीज भर्ती
मेडिकल कॉलेज में रविवार को ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस के 7 नए मामले पहुंचे हैं। इसके अलावा अस्पताल में तीन नए संदिग्ध मामले भी आए। फिलहाल अस्पताल के म्यूकरमाइकोसिस वार्ड में 85 मरीज दाखिल हैं। अब तक 143 मरीज सामने आ चुके हैं। रविवार को अस्पताल में एक मरीज की ब्लैक फंगस के कारण मौत हो गई। वैसे अन्य दिनों की अपेक्षा कम मौत हुई है, जो राहत की बात है। कुल मिलाकर मौत का आंकड़ा 28 हो गया है। वहीं मेडिकल कॉलेज में दाखिल ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए तय सीमा में दवा आने लगी है। रविवार को भी करीब 60 एंफोटेरेसिन के इंजेक्शन आए हैं।
किया जाता है एंटीबॉडी टेस्ट
चिकित्सकों के मुताबिक जिन मरीजों ने न टेस्ट करवाया और न ही कोरोना उपचार लिया है। ऐसे मरीजों में ब्लैक फंगस लक्षण मिलने पर पहले उनका एंटीबॉडी टेस्ट किया जाता है, ताकि पता चल सके कि इनमें एंटीबॉडी बनी है या नहीं। फिर इसी हिसाब से मरीजों का उपचार और टेस्ट कराए जाते हैं। इसके अलावा भी फंगस का पता लगाने के लिए मरीजों के सीटी स्कैन या एमआरआई टेस्ट करवाए जाते हैं।
9 मरीजों के हुए ऑपरेशन
रविवार को भी मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस मरीजों के ऑपरेशन हुए हैं। आंख रोग विभाग और ईएनटी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने कुल 9 ऑपरेशन किए। अब तक 66 मरीजों के ऑपरेशन हो चुके हैं और चार मरीजों की आंखें निकाली जा चुकी हैं।
आंख बचाने के लिए अपनाई नई विधि
अब आंख रोग विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीण रेवड़ी ने एक और नई विधि अपनाई है। इसके तहत मरीजों की आंखों के साइड से ऑपरेशन के जरिये दवाई डालकर फंगस रोकने का काम किया जाता है, ताकि आंख निकालने की नौबत न आए। यह केवल उन्हीं मरीजों के लिए संभव है, जो मरीज समय पर अस्पताल पहुंचते हैं। मरीज की आंखों में संक्रमण फैलता देख चिकित्सकों द्वारा आंख को बचाने के लिए यह कदम उठाया है। शनिवार को भी इस तरह के साथ ऑपरेशन हुए थे। इन मरीजों में फंगस आंखों की तरफ फैल रहा था।
एक मरीज की मौत
फिलहाल हमारे पास म्यूकरमाइकोसिस के कुल 85 मरीज दाखिल हैं, जिनमें तीन संदिग्ध हैं। रविवार को 9 मरीजों के ऑपरेशन हुए हैं और एक मरीज की मौत हुई है।
- डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफेसर, दंत रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
(संवाद)