हिसार। मेरे पोते नदीम को सेना ने अपनी जान पर खेलकर बचाया है। देश और देशवासियों की सेवा का यह जज्बा हमारे देश के सैनिकों में कूट-कूट कर भरा है, जिसका उदाहरण मैंने अपनी आंखों से देखा लिया है। अपने पोते नदीम को देश सेवा के लिए सेना में भेजूंगा।
यह कहना है जिंदगी और मौत की जंग के बीच मौत को मात देकर 60 फुट गहरे बोरवेल से जिंदा निकले नदीम के दादा खुर्शीद अहमद का। वे सेना का धन्यवाद करते नहीं थक रहे हैं। शनिवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत में खुर्शीद ने कहा कि उन्हें तब और भी ज्यादा खुशी होगी जब उनका पोता नदीम बड़ा होकर देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होगा। 48 घंटों के दौरान हमें जो देखने को मिला, उससे यह पता चला है कि हमारी सेना न केवल सरहद पर अपनी जान की बाजी लगाती है, बल्कि देश के अंदर देशवासियों की जान को बचाने के लिए भी अपनी जान जोखिम में डालने को तैयार रहती है।
परिवार के साथ खड़ा रहा गांव
नदीम के दादा खुर्शीद अहमद और पिता आजम ने कहा कि पूरा गांव उनका परिवार है। इस मुसीबत की घड़ी में जिस प्रकार पूरा गांव उनके साथ खड़ा रहा, उससे उन्हें हर पल हिम्मत मिलती रही। कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि वे अकेले हैं। सभी गांव वाले यही कह रहे थे कि नदीम उनका अपना बच्चा है और बाहर लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि सेना, ग्रामीणों, प्रशासन, पुलिस ने नदीम की जान बचाने के लिए जो प्रयास किए, उसकी तो उन्हें खुशी है ही, साथ ही इस बात की और भी अधिक खुशी है कि मुसीबत के वक्त हमें सबका भरपूर साथ मिला।