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ओबीसी आरक्षण वर्गीकरण के लिए समरसता यात्रा निकाली

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य जयसिंह बिश्नोई ने कहा कि ओबीसी आरक्षण का अब तक कुछ राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से मजबूत जातियां ही फायदा उठाती आ रही हैं। व्यवसाय, रहन-सहन और इतिहास के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग जातियों में उप श्रेणी करण का कार्य होना चाहिए। ओबीसी का आरक्षण मंडल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 27 से बढ़ाकर 52 प्रतिशत किया जाए।
ओबीसी आरक्षण में जातियों की सही पहचान और सही बंटवारे के लिए चलाए जा रहे समरसता अभियान के प्रधान सदस्य जय सिंह बिश्नोई के नेतृत्व में लोगों ने प्रदर्शन किया। शुक्रवार को राष्ट्रपति के नाम जिला उपायुक्त के माध्यम से भेजे ज्ञापन में मांग की है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के आदेशानुसार 23 अगस्त 2017 को केंद्र स्तर पर ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण के उपवर्गीकरण को जो निर्णय लिया गया है, उसमें तीन अन्य उप श्रेणियों की बजाय सात उप श्रेणियां बनाई जानी चाहिए। राष्ट्रपति की ओर से बनाए गए आयोग का समय बढ़ाया जाए। तीन महीने का समय काफी कम है। अन्य पिछड़ा वर्ग की सही पहचान और और आरक्षण का जातिगत गणना के आधार पर समान वितरण हो। अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल देश भर में एक ही जाति अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों से जानी जाती हैं। इनकी पहचान एक ही क्रम पर दर्ज की जाए ओबीसी का विमुक्त जनजातियां, घुमंतू जनजातियां, अर्ध घुमंतू, पारंपरिक काम-धंधा करे वाली कारू जातियां, दलित पिछड़ी जातियां, अल्पसंख्यक पिछड़ी जातियां व पिछड़ा वर्ग किसानी जातियों के आधार पर उप वर्गीकरण किया जाना चाहिए।
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केंद्र सरकार का ओबीसी आरक्षण को तीन श्रेणी में उप वर्गीकरण व्यवहारिक नहीं है। सक्षम जातियां इस आरक्षण का लाभ उठाती रहेंगी। समरसता अभियान को वह पूरे देश में चलाएंगे। इस मौके पर सतीश जांगड़ा, स्वायराम प्रजापति, ईश्वर सिंह नाई, बहादर सिंह स्वामी, फौजा सिंह राय सिख, रोहताश व सुरेश गाड़रिया लौहार, महावीर, रामजस व सुंदर नायक, हनुमान ज्याणी, केडी बिश्नोई, प्रदीप बिश्नोई, राजेंद्र गोदारा, सतीश बिश्नोई, पवन सोनी, सूबेदार दिलीप सिंह जाट, गुलाब मनियार, मास्टर जिले सिंह जाट किरतान, अरुण ढांडा, राजेश सैनी, बलबीर सैनी, कृष्ण गोस्वामी, शंकर चिंपी, विकास भाट, डॉ. बीर सिंह गौड़, गोकल बादी, प्रदीप गुर्जर, भूपेंद्र खाति, बीर सिंह औड़ आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
ऐसे किया जाएगा आरक्षण का वर्गीकरण
विमुक्त जनजातियों में कुचबंद, रिचबंद, सींगीवाला, बंजारा, गंवारियां आदि जातियां।
-घुमंतू जनजातियों में सपेरा, गड़रिया-लुहार, भाट, नट, जोगी, नाथ, नारी कुरुवा, मिरासी आदि जातियां।
- अर्ध घुमंतू में रेबारी, डाकौत, गडरिया, पैनजा, भगेल आदि जातियां।
-खाती, सुनार, नाई, दर्जी, कुम्हार, सुथार, तेली, सैनी, माली आदि को पारंपरिक काम-धंधा करने वाली कारू जातियां।
-दलित पिछड़ी जातियों में नूनगर, शोरगर, मंगता, फकीर आदि।
-अल्पसंख्यक पिछड़ी जातियों में मिरासी, रामगड़िया, मुल्ला जाट, ईसाई, मुस्लिम, सिख।
-पिछड़ा वर्ग के किसानी वर्ग में जाट, बिश्नोई, रोड़, त्यागी, जट-सिख।
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