अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
महाबीर स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय राज्यस्तरीय कुश्ती अखाड़ा प्रतियोगिता में रोहतक की पहलवान निक्की पहली हरियाणा केसरी बनीं। हरियाणा केसरी दंगल में दूूसरे पायदान पर सोनीपत की निक्की रहीं। हरियाणा कुमारी में जींद के निडाणी गांव की अंशु ने दंगल जीता। इसमें दूसरे स्थान पर रोहतक की नीतू रहीं।
ये हुए मुकाबले
प्रतियोगिता के अंतिम दिन हरियाणा केसरी दंगल, हरियाणा कुमारी दंगल, 18 अंडर आयु वर्ग और सीनियर वर्ग के फाइनल मुकाबले करवाए गए। सभी पहलवानों ने जीत दर्ज करने के लिए अपनी तरफ से जीतोड़ प्रयास किए। जीत का जुनून पहलवानों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।
खिलाड़ियों की जुबानी...
हरियाणा केसरी विजेता निक्की बोलीं, चाचा को खेलता देखकर उतरी अखाड़े में
हरियाणा केसरी का खिताब रोहतक के गांव धनाना की बेटी निक्की ने जीता। अमर उजाला से हुई बातचीत में निक्की ने बताया कि 13 वर्ष की उम्र में कुश्ती खेलना शुरू किया। कोच मनदीप सिंह ने मुझे इस काबिल बनाया है। निक्की अपने चाचा संदीप को कुश्ती खेलता देखकर मैदान में उतरीं। इस समय निक्की की उम्र मात्र 10 वर्ष थी। निक्की ने बताया कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। गांव के माहौल से बाहर निकलना एक लड़की के लिए काफी मुश्किल काम होता है। जब मैंने स्कूल खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया तो मेरे परिवार ने मेरी काबलियत को पहचान लिया। निक्की ने बताया कि मेरे पापा-मम्मी और कोच मनदीप ने मेरा हमेशा ही हौसला बढ़ाया है।
हरियाणा केसरी उपविजेता निक्की बोलीं, पापा का सपना पूरा करने उतरी दंगल में
सोनीपत के गांव सरगथल की होनहार बेटी निक्की हरियाणा केसरी दंगल अखाड़े में दूसरे स्थान पर रही। निक्की के पिता विजेंद्र मलिक हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर और माता गृहणी हैं। निक्की अब बुटाना के जनता महाविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ रही हैं। निक्की को बचपन में ही कुश्ती खेलने का शौक था। निक्की ने बताया कि मेरे पापा का सपना है कि मैं कुश्ती में देश का नाम रोशन करूं। मेरे पापा के सपने को पूरा करने के लिए मैंने कुश्ती को ही अपना कॅरिअर चुन लिया। ऑल इंडिया में ब्रांज मेडल के लिए कुश्ती लड़ रही थीं। इस दौरान उनके कंधे में इंजरी हो गई। इंजरी होने से निक्की को करीबन एक साल के लिए कुश्ती से दूरियां बनानी पड़ीं। निक्की ने अपनी जीत का श्रेय कोच संदीप बनवाला को दिया है।
जींद के किसान की बेटी बनीं हरियाणा कुमारी अंशु बोलीं : पिता को खेलता देख अखाड़े में उतरी
जींद के निडाणी गांव की लाडली बेटी अंशु ने हरियाणा कुमारी का खिताब जीता है। अंशु के पिता धर्मबीर सिंह गांव में ही खेती करते हैं। घर का गुजारा खेती से ही चलता है। अंशु ने अमर उजाला को बताया कि अपने पिता को कुश्ती खेलता देखकर इस खेल को चुना। अंशु के पापा अंतरराष्ट्रीय पहलवान है। अंशु वर्ल्ड कैडेट खेलों में गोल्ड, खेलो इंडिया में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। अंशु अब सीबीएसएम स्पोर्ट्स स्कूल निडाणी में कुश्ती अभ्यास कर रही हैं और 12वीं कक्षा की छात्रा हैं।
लड़कियों ने यह साबित कर दिखाया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं है। प्रतियोगिता में विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई है। प्रदेशभर से 550 खिलाड़ियों ने भाग लिया।
-समुंद्र सिंह, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हिसार