कुरुक्षेत्र के सरकारी अस्पताल से डॉक्टरों के नदारद रहने और स्टाफ की लापरवाही के कारण मंगलवार को एक महिला को टायलेट में ही अपने बच्चे को जन्म देना पड़ा। इससे जननी शिशु सुरक्षा योजना पर सवालिया निशान लग गया है।
दर्द से कहराती इस मजदूर महिला को डॉक्टर की सुविधा तो मिलना दूर यहां मौजूद पैरामेडिकल स्टाफ से भी मदद नहीं मिली। लापरवाही का आलम यह है कि इस स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी इस मामले की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
गांव ज्योतिसर से आई दाई दर्शनी देवी ने बताया कि वह अपने गांव से गर्भवती महिला को चेकअप के लिए अस्पताल लाई थी, लेकिन यहां महिला डॉक्टर नहीं मिली। इस दौरान परेशान मरीज लाइनों में लगे रहे। इसी बीच बिहार निवासी सीतो पत्नी सतपाल को प्रसव पीड़ा हो गई।
मौके पर कोई डॉक्टर नहीं होने के कारण वह शौचालय में गई, जहां उसने शिशु को जन्म दिया। दाई दर्शनी ने बताया कि इसके बाद उक्त महिला को तुरंत नगर के किसी अन्य अस्पताल में ले जाया गया। अस्पताल से ले जाते समय शिशु की आरनाल तक अलग नहीं की गई थी।
शौचालय में शिशु को जन्म देने वाली महिला भी गांव ज्योतिसर के पास ही रहने वाले बाहरी राज्य के मजदूर परिवार की सदस्य बताई गई है। इसकी पुष्टि पैरामेडिकल स्टाफ ने की है।