हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान इनेलो ने अपने पुराने गढ़ सिरसा जिले पर पूरा फोकस किया। प्रचार के अंतिम दिनों में अभय चौटाला ने नूंह जिले में 4 रैलियां की। वहीं, इनेलो व बसपा नेताओं ने खासतौर पर हरियाणा में बढ़ती बेरोजगारी, बढ़ते अपराध और विदेशों में पलायन कर रहे युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरा।
अपना वजूद बचाने की लड़ाई लड़ रहे हरियाणा के क्षेत्रीय दल इनेलो का प्रचार के दौरान अपने पुराने गढ़ पर ही फोकस रहा। अपने परपंरागत वोट बैंक को वापस लाने और बसपा के साथ गठबंधन कर दलितों का गठजोड़ बनाने के लिए इनेलो ने प्रदेशभर में 50 से अधिक रैलियां की हैं। इनमें एक रैली प्रदेशस्तरीय रही। उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल की जयंती पर 25 सितंबर उचाना में हुई रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती भी शामिल रहीं।
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इनके अलावा भी मायावती ने प्रदेश में पृथला, असंध और जगाधरी में रैलियां कर गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। वहीं, ओमप्रकाश चौटाला ने प्रचार के आखिरी सप्ताह में रोड शो कर दर्जनभर सीटों पर गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। पार्टी के स्टार प्रचारक राष्ट्रीय महासचिव अभय सिंह चौटाला ही रहे। बसपा की बात करें तो पिछली बार जहां जहां बसपा के उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे, वहां पर खुद मायावती ने रैलियां की और बसपा के काडर को जोड़ने की कोशिश की।
इन क्षेत्रों पर किया फोकस
इनेलो ने अपने पुराने गढ़ सिरसा जिले पर पूरा फोकस किया। सिरसा, ऐलनाबाद, रानिया, डबवाली, कालांवाली, फतेहाबाद, टोहाना पर जोर रखा। इनके अलावा, जींद के इलाके नरवाला, कैथल के कलायत और नूंह जिले की सभी सीटों पर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम किया है। प्रचार के अंतिम दिनों में अभय चौटाला ने नूंह जिले में 4 रैलियां की।
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बेरोजगारी, नशा और विदेशों में पलायन को बनाया मुद्दा
इनेलो व बसपा नेताओं ने खासतौर पर हरियाणा में बढ़ती बेरोजगारी, बढ़ते अपराध और विदेशों में पलायन कर रहे युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरा। इसके अलावा, नशे की चपेट में आए हरियाणा को लेकर भी अभय चौटाला लगातार हमलावर रहे हैं। जहां तक घोषणा पत्र की बात है तो इनेलो-बसपा ने भी प्रदेश की जनता के लिए बड़े वादे किए हैं। इनमें युवाओं को रोजगार से लेकर बुढ़ापा पेंशन 10 हजार रुपये करने का वादा किया है।