हरियाणा में निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश में जी-जान से जुटी प्रदेश सरकार ने सात और आठ मार्च को गुड़गांव में हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल समिट की तैयारी में तो कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन प्रदेश में हाल के आरक्षण आंदोलन की हिंसा से उपजे हालात ने सरकार के लिए इस समिट में भी मुश्किलें ख़ड़ी कर दी हैं।
प्रदेश सरकार जहां निवेशकों को राज्य में उपलब्ध संसाधनों और उद्योग लगाने के लिए दी जाने वाली सुविधाओं का हवाला देकर आकर्षित करने की योजना बना चुकी थी, उसे अब निवेशकों को प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर विश्वास भी दिलाना होगा और प्रदेश हिंसा के दौर से क्यों गुजरा, इसका भी जवाब देना होगा।
हैपनिंग हरियाणा समिट में हिस्सा लेने के लिए जरूरी रजिस्ट्रेशन का काम समाप्त होने के बाद यह तय हो गया है कि समिट में 901 डेलिगेट्स हिस्सा लेंगे। इनमें 78 डेलीगेट्स अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से जुड़े हैं, जबकि शेष घरेलू निवेशक हैं। भारत और विदेश की 836 कंपनियों ने समिट में हिस्सा लेने के लिए हामी भर दी है।
यह भी उम्मीद की जा रही है कि 9 मार्च का प्रवासी भारतीय सम्मेलन रद्द कर दिए जाने के बावजूद इसमें हिस्सा लेने के इच्छुक हरियाणा मूल के 223 एनआरआई जोकि दुनिया के 59 बड़े शहरों में बसे हैं, भी ग्लोबल समिट में हिस्सा लेने के लिए पहुंच सकते हैं। भारी संख्या में कंपनियों और डेलीगेट्स से समिट के प्रति उत्साह ने प्रदेश सरकार के हौसले बुलंद किए हैं और सरकार के सभी मंत्री हैपनिंग हरियाणा समिट के सफल रहने को लेकर आश्वस्त हो गए हैं।
ढाई लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव की उम्मीद
प्रदेश सरकार ने बीते दो माह के दौरान चीन-जापान की यात्रा और भारत के विभिन्न महानगरों में रोड शो के जरिए हरियाणा में उद्योगों के लिए आकर्षण पैदा किया था। उद्योग विभाग ने इन अभियानों को देखते हुए दावा किया है कि ढाई लाख करोड़ का निवेश प्रस्ताव प्रदेश में आएगा। दरअसल, दो माह में बनाई गई छवि का ही नतीजा रहा कि चीन के वांडा ग्रुप के अलावा कई बड़े उद्योगों ने हरियाणा में आने को लेकर रुचि दिखाई थी।
प्रदेश में पहली बार आयोजित किए जा रहे अपनी तरह के इस पहले समिट में सरकार को उम्मीद थी कि कई कंपनियों के साथ मौके पर ही एमओयू साइन कर लिए जाएंगे, लेकिन आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश में जिस तरह व्यापार और उद्योग प्रभावित हुए हैं, उसने सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
हालांकि, प्रदेश के वित्त मंत्री आंदोलन की हिंसा को सुनियोजित षड्यंत्र करार देते हुए इसे खुफिया तंत्र की नाकामी बता रहे हैं, लेकिन उद्योग जगत प्रदेश में आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ठप होने जाने से स्तब्ध हैं। उद्योग विभाग के सूत्रों का कहना है कि समिट के दौरान किसी कंपनी के साथ एमओयू साइन हो पाने के आसार बहुत कम हैं।